लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दो टूक कहा- अफगान के हालात से भारत को नहीं है कोई खतरा

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दो टूक कहा है कि भारत आतंकवाद और विस्तारवाद के पूरी तरह खिलाफ है। देश का स्पष्ट मानना है कि सभी देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। अफगानिस्तान में बदले हालात पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हालात चिंताजनक हैं, लेकिन इससे भारत को कोई खतरा नहीं है। लेह में पंचायती राज से जुड़े संसदीय पहुंच कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह बयान उस जगह दिया है जहां से चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को सीधा संदेश जाता है। लेह में इस समय संसदीय कामकाज से जुड़ी गतिविधियां तेज है और कई संसदीय समितियां अपनी बैठकों के लिए यहां पहुंच रही हैं।

बिरला ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान का असर हमारे देश पर नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, विस्तारवाद व सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियों से निबटने में हमारे जवान सक्षम हैं। हमारी सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। चीन का नाम न लेते हुए बिरला ने कहा कि कुछ देशों की विस्तारवादी नीतियों की वजह से सीमाओं पर विवाद पैदा होता है।

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव पर बिरला ने कहा कि यहां जल्द चुनाव कराये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द परिसीमन की प्रक्रिया खत्म होगी और उसके बाद यहां चुनाव कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बदली हुई परिस्थिति के बाद इस क्षेत्र में विकास की बयार शुरू हुई है। बिरला 27 अगस्त को लेह और 31 अगस्त को श्रीनगर में पंचायत के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने वाले हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पंचायत को ज्यादा से ज्यादा सशक्त करना है। बिरला का कहना है कि पंचायती व्यवस्था अगर मजबूत होगी तो लोकतंत्र की रीढ़ मजबूत होगी।

गुरुवार सुबह लेह पंहुचे ओम बिरला लगातार सक्रिय हैं। पंचायती राज से जुड़े जिस कार्यक्रम में उनको हिस्सा लेना है वह शुक्रवार को है, लेकिन इसके पहले गुरुवार को उन्होंने लेह दौरे पर आई दो संसदीय समितियों से मुलाकात की है। इस समय लेह में वाणिज्य और शहरी विकास से संबंधित संसदीय समितियां दौरे पर हैं। बिरला ने इन समितियों के सदस्यों से उनके जम्मू-कश्मीर और लद्याख दौरे का फीडबैक भी लिया। इसके अलावा यहां आमजन और जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर रहे है। बिरला आम जन से उनकी आशाओं और अपेक्षाओं के बारे में पूछ रहे हैं और जन प्रतिनिधियों से उनके दायित्वों को निभाने में आ रही कठिनाइयों पर बात कर रहे हैं।

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