सबरीमाला मंदिर के खुले कपाट, दर्शन के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब

केरल: केरल का सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) भक्तों के लिए आज यानी 17 नवंबर से खोल दिया गया है। सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंच रहे है। आपकों बता दें कि सबरीमाला मंदिर में आज से ‘मंडलम-मकरविलक्कू’ का मौसम भी शुरू हो रही है, जो 16 जनवरी तक चलेगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोविड-19 प्रतिबंधों के हटने के बाद करीब दो महीने लंबी वार्षिक तीर्थ यात्रा की शुरूआत की पूर्व संध्या पर प्रसिद्ध भगवान अयप्पा मंदिर के द्वार बुधवार शाम ही खोल दिए गए हैं। लेकिन, श्रद्धालुओं के लिए ये द्वार आज शाम 5 बजे खुलेंगे। बता दें कि 17 नवंबर को वर्चुअल कतार प्रणाली में पंजीकरण के अनुसार, लगभग 49,000 भक्तों के मंदिर आने की उम्मीद है।

खबर के मुताबिक, 16 नवंबर को मंदिर के गर्भगृह के कपाट मुख्य पुजारी की उपस्थिति में निवर्तमान प्रधान पुजारी एन परमेश्वरन नंबूथीरी द्वारा खोला गया। इसके बाद से भगवान अयप्पा और मलिकप्पुरम मंदिरों के नव चयनित प्रधान पुजारी अगले एक साल की अवधि के लिए पूजा करने का काम संभालेंगे। 41 दिनों तक चलने वाला मंडला पूजा उत्सव का समापन 27 दिसंबर को होगा।

बता दें, सबरीमाला मंदिर करीब 800 साल पुराना है और यहां हमेशा से महिलाओं के प्रवेश पर रोक थी। मान्यता है कि सबरीमाला मंदिर में विराजमान भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं। इस कारण युवा महिलाओं का प्रवेश यहां वर्जित किया गया है। हालांकि, 28 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि मंदिर में हर उम्र की महिलाएं प्रवेश कर सकेंगी। हमारी संस्कृति में महिलाओं को देवी की तरफ पूजा जाता है। लेकिन, महिलाओं के प्रवेश से रोका जा रहा है यह स्वीकार्य नहीं है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ------------------------- -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------ -------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------- --------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------   ----------------------------------------------------------- -------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------- -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper