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चीन में जुटेंगी दुनिया की तीन महाशक्तियां! एक मंच पर दिख सकते हैं ट्रंप, पुतिन और जिनपिंग, इसी महीने बैठक की तैयारी

नई दिल्ली: दुनिया की तीन बड़ी शक्तियों के शीर्ष नेताओं की एक साथ मुलाकात की संभावना बन रही है। चीन ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बैठक को लेकर बातचीत चल रही है। यह मुलाकात इसी महीने चीन के शेनझेन शहर में हो सकती है। हालांकि, अभी तक इसकी तारीख और आधिकारिक कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। यदि तीनों नेता एक मंच पर आते हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम घटनाक्रम होगा। लेकिन इस बैठक में किसी बड़े समझौते की संभावना पर सवाल बने हुए हैं।

समाचार एजेंसी के मुताबिक, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि तीनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक को लेकर संबंधित पक्षों के साथ संपर्क जारी है। यह मुलाकात एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) के नेताओं के सम्मेलन के दौरान हो सकती है। इस संगठन में अमेरिका और रूस सहित कुल 21 देश शामिल हैं।

ट्रंप और जिनपिंग की भी हो सकती है मुलाकात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शेनझेन दौरे पर जाने की संभावना है। इस दौरान उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इस साल तीसरी मुलाकात हो सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसकी अवधि जनवरी में समाप्त होने वाली है। ऐसे में इस बैठक में व्यापार समझौते को लेकर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। शुक्रवार को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग से वीडियो कॉल पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने चीन से कृषि उत्पादों की खरीद, दुर्लभ खनिजों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर पहले किए गए वादों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

पुतिन उठा सकते हैं यूक्रेन युद्ध का मुद्दा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के साथ परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के मुद्दे पर चर्चा करना चाहेंगे। वहीं, पुतिन इस बैठक में यूक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाना चाहते हैं। उनकी कोशिश हो सकती है कि इस बातचीत में यूक्रेन को शामिल न किया जाए।

ओबामा प्रशासन में विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी डैनी रसेल का मानना है कि इस बैठक से सबसे अधिक फायदा पुतिन को मिल सकता है। उन्हें ट्रंप और जिनपिंग के साथ एक मंच पर नजर आने का अवसर मिलेगा, जो उनके लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि होगी। रसेल के मुताबिक, ट्रंप भी इस मुलाकात में रुचि रखते हैं। हालांकि, उन्हें यह सलाह दी गई हो सकती है कि बातचीत के दौरान यूक्रेन का मुद्दा न उठाएं।

क्या बैठक केवल साथ तस्वीर खिंचवाने तक रहेगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों देशों के हित अलग-अलग हैं। ऐसे में किसी बड़े समझौते पर पहुंचना आसान नहीं होगा। चीन भी नहीं चाहेगा कि इस बैठक को दुनिया की तीन बड़ी शक्तियों के बीच वैश्विक व्यवस्था को अपने हिसाब से बांटने की कोशिश के रूप में देखा जाए।

स्टिमसन सेंटर की विशेषज्ञ सुन यून के अनुसार, रूस इस बैठक के जरिए अमेरिका और चीन को यूक्रेन के मुद्दे पर अपने रुख के करीब लाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में चीन के सामने रूस की इस रणनीति से निपटने की चुनौती होगी। सुन का मानना है कि चीन परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के साथ-साथ यूक्रेन और ईरान के मुद्दों पर ठोस बातचीत से बचना चाहेगा। उसका जोर शांति का संदेश देने पर रह सकता है।

वहीं, फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के क्रेग सिंगलटन का मानना है कि यह बैठक पुतिन के लिए अमेरिकी और चीनी नेताओं के साथ तस्वीर खिंचवाने का अवसर हो सकती है। हालांकि, उनके मुताबिक अब इस तरह की तस्वीरों से पहले जैसी कूटनीतिक उपलब्धि हासिल नहीं होती। ऐसे में तीनों नेताओं के एक साथ नजर आने की संभावना तो है, लेकिन किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद कम दिखाई देती है।

फिलहाल चीन ने तीनों नेताओं की संभावित बैठक को लेकर बातचीत जारी होने की पुष्टि की है। हालांकि, यह मुलाकात वास्तव में होगी या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।

 

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