रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय एवं रौशनाई ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर पुरस्कार वितरण एवं कवि सम्मेलन समारोह का आयोजन

बरेली ,27 सितम्बर।महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय एवं रौशनाई ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर पुरस्कार वितरण एवं कवि सम्मेलन समारोह का आयोजन कल प्रो. एस.वी. सिंह मेमोरियल सभागार, विश्वविद्यालय परिसर में किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत माननीय कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय एवं सारस्वत अतिथि प्रो. ए.डी.एन. बाजपेयी, पूर्व कुलपति, द्वारा माँ शारदा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. विजय बहादुर सिंह यादव ने हिंदी भाषा का प्रयोग रोजमर्रा की ज़िंदगी में करने का आह्वान किया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. आशुतोष प्रिय ने हिंदी भाषा को राष्ट्र का गौरव बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर रुचि द्विवेदी ने किया।
कवि सम्मेलन का प्रारंभ उमेश त्रिगुण्यात ने हिंदी को भारत की आन-बान-शान बताकर किया। दिल्ली से आईं प्रसिद्ध कवयित्री प्रीति त्रिपाठी ने अपनी रचना “बेटियाँ गुलाब होती हैं…” सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया—
“बेटियाँ गुलाब होती हैं,
बुनती हैं सपनों को, थकती नहीं हैं,
मुस्कराती हैं, किंतु हँसती नहीं हैं।
ऐसी फ़सल है जो पकती नहीं है,
है द्वार घर का तख़्ती नहीं है।
अंतस में द्वंद लिए, कविता के छंद लिए,
अनखुली किताब होती हैं, बेटियाँ गुलाब होती हैं।”
प्रमुख कवि अखिलेश प्रताप सिंह ने “परिंदों की तरह उड़ने की ख्वाहिश में ज़मीन से कट जाते हैं” जैसी पंक्तियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। दिल्ली से आए प्रसिद्ध ग़ज़लकार आलोक यादव ने अपनी शायरी से महफ़िल में शमा बाँध दी। उन्होंने कहा—
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“अब न रावण की कृपा का भार ढोना चाहता हूँ,
आ भी जाओ राम, मैं मारीच होना चाहता हूँ।
थक चुका हूँ और कब तक ये दुआ करता रहूँ मैं,
एक कंधा कर अता मौला, की रोना चाहता हूँ।
जिनकी हाथों में किताबों की जगह औज़ार देखे,
उनकी आँखों में कोई सपना सज़ोना चाहता हूँ।”
देश की जानी-मानी कवयित्री सिया सचदेव ने “ये तो अच्छा है कि बेरंग हैं आँसू…” जैसी पंक्तियों से महफ़िल लूट ली। युवा कवि उज्जवल ने “तारों को गिरते देख लिया, आसमान से लगने लगा है डर हमें ऊँची उड़ान से” सुनाकर तालियाँ बटोरीं। प्रो. ए.डी.एन. बाजपेयी ने कहा कि “कविता जी जाती है, लिखी नहीं जाती।” कवि सम्मेलन का संचालन डॉ. अवनीश यादव ने किया।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. प्रीति यादव ने निबंध प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए किया।
इस अवसर पर कुलसचिव महेंद्र कुमार, प्रो. एस.के. पांडे, प्रो संजय मिश्रा, प्रो. संतोष अरोड़ा, प्रो. त्रिलोचन शर्मा, प्रो. रवींद्र सिंह, डॉ. आभा त्रिवेदी, प्रो. अनीता त्यागी, डॉ. सौरव वर्मा, प्रो. यशपाल सिंह, डॉ. पवन कुमार सिंह तथा शिक्षकगण, शोधार्थी, छात्र-छात्राएँ आदि उपस्थित रहे।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

