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आईवीआरआई द्वारा किण्वित जैविक खाद,संतुलित पोषण प्रबंधन एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित


बरेली,27 सितम्बर। कृषि विज्ञान केन्द्र, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली की सीएसआर-मारुति परियोजना के अंतर्गत मुरादाबाद जनपद के 50 किसानों के लिए किण्वित जैविक खाद (Fermented Organic Manure), संतुलित पोषण प्रबंधन एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक इनपुट, प्राकृतिक खेती, पौध संरक्षण तथा कृषि अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन की नवीन एवं व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डा. रूपसी तिवारी, सयुंक्त निदेशक प्रसार शिक्षा, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली ने संस्थान द्वारा विकसित की गयी तकनीकियों, संस्थान द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी एवं किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी कृषि संबंधी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं पर चर्चा की तथा वैज्ञानिक समाधान सुझाए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शस्य विज्ञान संभाग के अध्यक्ष एवं परियोजना समन्वयक डॉ. एस. एस. राठौर तथा डॉ. विशाल सिंह सोमवंशी, सूत्रकृमि विज्ञान संभाग, ICAR-IARI, नई दिल्ली ने कृष्कों से किण्वित जैविक खाद के वैज्ञानिक महत्व, उपयोग की विधि तथा कृषि में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। किसानों को बताया गया कि जैविक खादों का वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग मृदा में जैविक पदार्थ एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखने तथा मृदा स्वास्थ्य में सुधार किया जा रहा है । एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) अपनाने की सलाह दी, जिसमें जैविक एवं रासायनिक पोषक स्रोतों का फसल की आवश्यकता एवं मृदा परीक्षण के आधार पर समन्वित उपयोग किया जाता है। किसानों से बिना मृदा परीक्षण के उर्वरकों के अनावश्यक प्रयोग से बचने तथा नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों काण संतुलित उपयोग करने का आग्रह किया गया ।
डा. अरविंद सिंह तेतरवाल, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को बताया कि फसल अवशेषों और पशु अपशिष्टों को किण्वित करके तैयार की गई जैविक खाद भूमि की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। इसके उपयोग से किसान यूरिया और डीएपी जैसे महंगे रासायनिक खाद पर होने वाले खर्च में 25 से 30 प्रतिशत तक की कटौती कर सकते हैं एवं कृषि विज्ञान केंद्र बरेली द्वारा चलाये जा रहे अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं सरकार की विभिन्न परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करी ।
डॉ. आर. एल. सागर, विषय वस्तु विशेषज्ञ शस्य विज्ञान केवीके ने किसानों को किण्वित जैविक खाद के द्वारा पोषण से सम्बन्धित प्रबंधन एवं प्रयोग विधि के बारे में बताया एवं किण्वित खाद में मौजूद पोषक तत्वों से फसल उत्पादन (गेहूं, धान, तिलहन और सब्जियों) में बुआई या रोपाई के समय तथा खड़ी फसल में छिड़काव से फसल की वृद्धि और दाने का विकास बेहतर होता है।
डॉ. रंजीत सिंह, विषय वस्तु विशेषज्ञ, ने जानकारी दी कि पारंपरिक खाद की तुलना में किण्वित तरल खाद में मौजूद पोषक तत्व पौधों को बहुत जल्द प्राप्त होते हैं।
डॉ. लक्ष्य यादव विषय वस्तु विशेषज्ञ ने बताया कि किण्वित जैविक खाद में भारी मात्रा में मित्र जीवाणु (Beneficial Microbes) पनपते हैं। ये जीवाणु मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंद को खत्म करते हैं, जिससे फसलों में जड़ सड़न और उकठा (Wilt) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।
डॉ. एम पी सागर, प्रधान वैज्ञानिक, केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, ने कहा कि खेती और मुर्गी पालन एक-दूसरे के पूरक हैं। फसलों से मिलने वाले उप-उत्पाद (Sub-products) मुर्गियों के दाने में काम आते हैं, वहीं मुर्गी फार्म की खाद खेतों की उर्वरता बढ़ाती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह मॉडल आर्थिक आत्मनिर्भरता का सबसे आसान रास्ता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृष्कों को CBG प्लांट का स्थल भ्रमण कराया गया । श्री शकील अहमद, CBG प्लांट के संचालक, ने किसानों को कृषि अवशेषों एवं जैविक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उनके मूल्य संवर्धन तथा अपशिष्ट से उपयोगी संसाधन तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने किसानों को किण्वित जैविक खाद, संतुलित पोषण प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, जैविक इनपुट, प्राकृतिक खेती, पौध संरक्षण एवं कृषि अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित जानकारी प्रदान की ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं तकनीकी मार्गदर्शन में IARI परियोजना टीम के सदस्यों डॉ. राजीव कुमार सिंह, डॉ. कपिला शेखावत, डॉ. आंचल, डॉ. सुभाष बाबू, डॉ. प्रवीण कुमार उपाध्याय, डॉ. विशाल त्यागी, डॉ. मोना, डॉ. अर्जुन सिंह एवं डॉ. स्मृति का विशेष योगदान रहा। किसानों के साथ समन्वय एवं प्रशिक्षण गतिविधियों के सफल संचालन में वाई.पी. मनीष कुमार प्रजापति (बरेली) एवं वाई.पी. मुनीश पाल (मुरादाबाद) की सक्रिय भूमिका रही। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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