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गोंडा में बिना एस्टीमेट 11 केवी लाइन तैयार! वायरल वीडियो से खुली पोल, मुख्य अभियंता ने बिठाई 3 सदस्यीय जांच समिति

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नवाबगंज क्षेत्र के तुलसीपुर माझा गांव में बिना एस्टीमेट पास हुए एक प्लांट तक 11 केवीए की पूरी लाइन तैयार कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि विभाग में इस लाइन का एस्टीमेट अब भी पेंडिंग बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर लाइन खड़ी कर दी गई। जब इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो विभाग में हड़कंप मच गया।

तुलसीपुर माझा में बना दी पूरी 11 केवीए लाइन

मामला नवाबगंज पावर हाउस क्षेत्र के अंतर्गत तुलसीपुर माझा गांव का है। यहां एक प्लांट को बिजली कनेक्शन देने के लिए 11 केवीए की लाइन तैयार कर दी गई, जबकि विभागीय एस्टीमेट पास नहीं हुआ था। आरोप है कि एक संविदा लाइनमैन ने जुगाड़ के बल पर पूरी लाइन तैयार कर दी।

अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब एस्टीमेट स्वीकृत नहीं हुआ था, तो पोल, तार और क्रॉस आर्म जैसे सामग्री कहां से आई। क्या यह सब बिना विभागीय जानकारी के संभव था या फिर इसमें अन्य कर्मचारियों की भी मिलीभगत थी? फिलहाल इन सवालों का स्पष्ट जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, खुली विभाग की पोल

जब इस विद्युत लाइन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, तब जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटी। वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने आनन-फानन में कार्रवाई शुरू की और पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए।

मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने दिए जांच के आदेश

इस मामले में विभाग के मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने बताया कि नवाबगंज पावर हाउस के अंतर्गत बाबा कुटी गांव में एसी इंफ्रा लिमिटेड ने 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के लिए ठेका लिया है और वहां प्लांट स्थापित किए गए हैं। उसी को कनेक्शन देने के लिए लाइन निर्माण प्रस्तावित था और उसका एस्टीमेट दिया गया था, लेकिन संबंधित पक्ष ने एस्टीमेट की धनराशि जमा नहीं की। इसके बावजूद लाइन बनवा दी गई।

उन्होंने बताया कि संबंधित जेई ने थाने में तहरीर दी है और विभाग स्तर पर भी जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

तीन सदस्यीय जांच समिति गठित, 3 दिन में रिपोर्ट

मुख्य अभियंता ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति के अध्यक्ष अधीक्षण अभियंता इंजीनियर संजय गुप्ता को बनाया गया है, जबकि सदस्य के रूप में इंजीनियर राम मनोहर पांडे और लेखाकार अखिलेश कुमार को शामिल किया गया है।

समिति को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि आखिर बिना स्वीकृत एस्टीमेट के 11 केवीए लाइन कैसे खड़ी हो गई और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार है।

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