Top Newsउत्तर प्रदेश

अंतरराष्ट्रीय एक्यूपंक्चर दिवस पर डॉ. देवेश श्रीवास्तव का संदेश: “बिना हानिकारक दवाओं के दर्द और रोग से मुक्ति संभव”

लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय एक्यूपंक्चर दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश आयुष विभाग के पूर्व वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. देवेश कुमार श्रीवास्तव ने एक्यूपंक्चर को वैज्ञानिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति बताते हुए कहा कि यह उपचार बिना हानिकारक दवाओं के भी संभव है। उन्होंने अपने विशेष संदेश में कहा कि अत्यंत पतली और लगभग painless सुइयों के माध्यम से किया जाने वाला यह उपचार दर्द से पीड़ित रोगियों को त्वरित राहत देता है और कई जटिल व पुरानी बीमारियों में भी प्रभावी सिद्ध हो रहा है।

चार दशकों से सेवा, आयुष पद्धतियों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका

उत्तर प्रदेश आयुष विभाग से जुड़े डॉ. श्रीवास्तव आयुर्वेद, पंचकर्म, योग, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, ओरिकुलो थेरेपी और रिलेक्सेशन थेरेपी के विशेषज्ञ हैं। वे लगभग चार दशकों से चिकित्सा सेवा में सक्रिय हैं। निःशुल्क चिकित्सा शिविरों, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा टीवी चैनलों के माध्यम से वे आमजन को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान कर रहे हैं। हेल्पलाइन 9935377666 के जरिए भी वे लोगों को हानिकारक दवाओं के दुष्प्रभावों से बचने की सलाह देते हैं।

15 से 20 सिटिंग में कई रोगों में राहत का दावा

डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार एक्यूपंक्चर 15 से 20 सिटिंग के भीतर कई रोगों में लाभकारी सिद्ध हो रहा है। इनमें सर्वाइकल और कमर दर्द (स्लिप डिस्क, साइटिका), घुटना दर्द, गठिया और जोड़ों का दर्द, माइग्रेन व सिरदर्द, लकवा (पैरालिसिस), साइनसाइटिस, दमा और एलर्जी, गैस व एसिडिटी जैसे पाचन विकार, अनिद्रा, तनाव और अवसाद शामिल हैं। इसके अलावा मधुमेह और उच्च रक्तचाप में सहायक चिकित्सा के रूप में, महिला रोगों और हार्मोनल असंतुलन, मोटापा तथा मेटाबॉलिक विकारों में भी इसे उपयोगी बताया गया है।

प्रमुख एक्यूपंक्चर बिंदुओं पर painless उपचार

उन्होंने बताया कि Large Intestine, Lung, Pericardium, Stomach, Spleen, Heart, Small Intestine, Urinary Bladder, Kidney, Triple Warmer, Gall Bladder, Liver, Governing Vessel और Ren Channel जैसे प्रमुख एक्यूपंक्चर चैनलों के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अत्यंत पतली सुइयों से उपचार किया जाता है। सामान्यतः 15 से 20 सिटिंग में रोगी को दर्दमुक्त और रोगमुक्त करने का लक्ष्य रखा जाता है।

जिन रोगियों को सुइयों से भय होता है, उनके लिए विशेष रूप से विकसित रिलेक्सेशन थेरेपी और एक्यूप्रेशर पद्धति के माध्यम से उपचार किया जाता है।

स्वस्थ और संतुलित जीवन है मुख्य लक्ष्य

डॉ. देवेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर लोगों को हानिकारक दवाओं के दुष्प्रभावों से बचाना और आयुर्वेद, पंचकर्म, योग, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, ओरिकुलो थेरेपी व रिलेक्सेशन थेरेपी के माध्यम से स्वस्थ और संतुलित जीवन प्रदान करना है। उन्होंने दावा किया कि अब तक हजारों मरीजों को लाभ मिल चुका है और वे निरंतर जनसेवा में समर्पित हैं।

 

---------------------------------------------------------------------------------------------------