Friday, June 12, 2026
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लाल बाल वालों के लिए चेतावनी, काले बाल वालों के लिए भी अहम संकेत: रिसर्च में सामने आए बालों और सेहत के बीच चौंकाने वाले संबंध

नई दिल्ली: बालों के रंग और स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर सामने आई एक नई रिसर्च ने कई चौंकाने वाले संकेत दिए हैं। अलग-अलग अध्ययनों में यह पाया गया है कि बालों का रंग सीधे किसी बीमारी का कारण नहीं होता, लेकिन यह कुछ स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा संकेत जरूर हो सकता है। विशेषज्ञों ने इसे लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

लाल या तांबे रंग के बाल वालों में त्वचा कैंसर का खतरा

रिसर्च के अनुसार लाल या तांबे रंग के बाल वाले लोगों में MC1R नामक जीन अधिक पाया जाता है, जो शरीर में हल्के रंग के पिगमेंट के निर्माण को प्रभावित करता है। कई अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि ऐसे लोगों में मेलेनोमा यानी खतरनाक त्वचा कैंसर का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल बालों का रंग ही इस बीमारी का कारण नहीं है। धूप में अधिक समय बिताना, त्वचा पर तिलों की संख्या और पारिवारिक इतिहास जैसे कई अन्य कारक भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। कुछ शोधों में यह भी संकेत मिले हैं कि लाल बाल वालों में दर्द सहने की क्षमता अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है, लेकिन इस पर अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।

काले बाल वालों में एलोपेशिया का बढ़ा जोखिम

दूसरी ओर, काले या गहरे रंग के बालों से जुड़े एक अध्ययन में यह पाया गया है कि एलोपेशिया एरिएटा नामक ऑटोइम्यून बीमारी का जोखिम कुछ अधिक हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से बालों की जड़ों पर हमला करने लगती है, जिससे सिर या दाढ़ी में गोल पैच बनकर बाल झड़ने लगते हैं।

ब्रिटेन में किए गए बड़े स्वास्थ्य रिकॉर्ड आधारित अध्ययन में यह सामने आया कि काले बाल वाले लोगों में यह समस्या भूरे बालों की तुलना में अधिक देखी गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बालों का रंग अकेला कारण नहीं है, बल्कि जेनेटिक और पर्यावरणीय कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

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