सोनम वांगचुक की भावुक अपील- ‘साथियों, मुझे आपसे मदद चाहिए’, 15 अगस्त पर मांगा खास तोहफा
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने स्वतंत्रता दिवस से पहले देश के भविष्य और नेतृत्व को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि अगर 15 अगस्त पर उन्हें कोई उपहार देना चाहते हैं तो ऐसे लोगों के नाम सुझाएं जो निस्वार्थ भाव से काम करते हों, चरित्रवान हों और सिद्धांतों पर कायम रहते हुए देश में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हों।
वांगचुक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह बीमार थे और बिस्तर पर रहते हुए लगातार देश के भविष्य के बारे में सोच रहे थे। उन्होंने कहा कि इस दौरान जितना विचार किया, उतनी ही निराशा बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि करीब पांच दशक पहले भारत के बराबर या उससे पीछे माने जाने वाले कई छोटे देश आज कई क्षेत्रों में भारत से आगे निकल चुके हैं। उन्होंने थाइलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी जैसे मानकों का भी जिक्र किया।

‘2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?’
सोनम वांगचुक ने सवाल उठाया कि अगर मौजूदा परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य कैसे हासिल होगा। उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था को भी भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था पिछड़ी रहेगी, तब तक देश के भविष्य को भी अपेक्षित गति नहीं मिल सकती।
उन्होंने हाल के आंदोलनों और राजनीतिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों ने बदलाव की इच्छा जताई और कुछ परिवर्तन भी हुए, लेकिन केवल सरकार या मंत्रियों को बदलने से किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं की जा सकती।
‘पार्टियों की नहीं, देश की बात कर रहा हूं’
वांगचुक ने कहा कि उनकी चिंता किसी एक राजनीतिक दल या सत्ता पक्ष-विपक्ष तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग दलों की सरकारों में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर कार्रवाई का रवैया कई बार एक जैसा दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि केवल सत्ता परिवर्तन से भ्रष्टाचार और अन्याय खत्म नहीं हुआ है। उनके मुताबिक देश में इससे कहीं बड़ा और शांतिपूर्ण बदलाव जरूरी है, जिसके जरिए सही नेतृत्व को आगे लाया जा सके।
‘सही नेता नहीं होगा तो देश गलत दिशा में जाएगा’
सोनम वांगचुक ने राजनीतिक नेतृत्व को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी कमियों में से एक सही नेतृत्व का चुनाव करने में रही है। उनके मुताबिक नेतृत्व सही दिशा में नहीं होगा तो उसका असर पूरे देश की दिशा पर पड़ सकता है।

उन्होंने दावा किया कि संसद के करीब आधे सदस्यों पर आरोप हैं और कई सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने गंभीर आपराधिक आरोपों का भी जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उनकी बात किसी एक पार्टी या सत्ता पक्ष अथवा विपक्ष के खिलाफ नहीं है।
बुद्धिजीवियों और ‘बेस्ट माइंड्स’ से मांगा सहयोग
वांगचुक ने कहा कि देश में बड़े बदलाव के लिए वह देश के ‘बेस्ट माइंड्स’ और बुद्धिजीवियों को एक साथ लाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने लोगों से ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने में मदद मांगी, जो बौद्धिक रूप से सक्षम होने के साथ-साथ निस्वार्थ, चरित्रवान और सिद्धांतों पर चलने वाले हों।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे ऐसे लोगों के नाम सुझाएं जिन्हें वे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और जिन्हें देश के भविष्य के लिए नई दिशा तय करने में योगदान देने योग्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से मिलने के लिए वह अलग-अलग राज्यों और शहरों में जाने की भी कोशिश करेंगे।
15 अगस्त पर मांगा ‘खास तोहफा’
सोनम वांगचुक ने देशवासियों से कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें उपहार के तौर पर ऐसे लोगों के नाम दिए जाएं, जिनमें देश को आगे ले जाने की क्षमता और नीयत हो। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए अपनी अपील रखी।
गौरतलब है कि वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के समर्थन में 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उनके अनशन के बाद आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने का दावा किया गया था। इसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात भी सामने आई थी।
