पश्चिम एशिया संकट के बीच IMEC पर जोर, जयशंकर बोले—मजबूत कनेक्टिविटी समय की जरूरत

एस. जयशंकर ने फ्रांस दौरे के दौरान जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक कनेक्टिविटी को मजबूत करने में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) की अहम भूमिका पर जोर दिया।
जी7 बैठक में कनेक्टिविटी पर भारत का जोर

G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण सुरक्षित सप्लाई चेन और मजबूत व्यापार मार्गों की जरूरत और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि आईएमईसी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
एफटीए से बढ़ेगा IMEC का प्रभाव
जयशंकर ने बताया कि यूरोपीय संघ, यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन और ब्रिटेन के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते आईएमईसी को और मजबूत बनाएंगे और इसके आर्थिक प्रभाव को बढ़ाएंगे।
वैश्विक साझेदारी को लेकर बढ़ता उत्साह
उन्होंने कहा कि इस कनेक्टिविटी परियोजना को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच उत्साह बढ़ रहा है, जो भविष्य में वैश्विक व्यापार को नई दिशा दे सकता है।

यूएनएससी सुधार और ग्लोबल साउथ की चिंताओं पर फोकस
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की जरूरत दोहराई। उन्होंने ऊर्जा संकट, उर्वरक आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ग्लोबल साउथ की चिंताओं को भी प्रमुखता से उठाया।
ब्रिटेन और जर्मनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत
विदेश मंत्री ने यवेट कूपर और जोहान वेडफुल के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इन बैठकों में वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
कई देशों के समकक्षों से भी मुलाकात
एस जयशंकर ने कनाडा, जापान और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। अनीता आनंद के साथ बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई। वहीं दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री के साथ साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
