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रेलवे का बड़ा फैसला! अब 100% स्वदेशी एल्युमिनियम बॉडी में दौड़ेंगी नई वंदे भारत ट्रेनें, रफ्तार और सुरक्षा दोनों होंगी हाईटेक

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे देश में हाई-स्पीड और आधुनिक रेल नेटवर्क को नई दिशा देने की तैयारी में जुट गया है। वंदे भारत 3.0 मिशन के तहत रेल मंत्रालय ने भविष्य की सभी वंदे भारत स्लीपर और हाई-स्पीड ट्रेनों को 100 फीसदी स्वदेशी एल्युमिनियम बॉडी के साथ तैयार करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। रेलवे का यह कदम आने वाले वर्षों में भारतीय रेल प्रणाली के लिए बड़ा गेम चेंजर माना जा रहा है।

इस फैसले के बाद ट्रेनों की बॉडी और विशेष तकनीकी कंपोनेंट्स के लिए भारत की विदेशी देशों पर निर्भरता लगभग खत्म हो जाएगी। रेलवे अब पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ मॉडल पर फोकस करते हुए घरेलू स्तर पर डिजाइनिंग, वेल्डिंग और असेंबलिंग को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है।

स्टील से हल्की होगी एल्युमिनियम बॉडी

फिलहाल देश में चल रही सभी वंदे भारत ट्रेनें स्टेनलेस स्टील से तैयार की गई हैं। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, एल्युमिनियम बॉडी इस्तेमाल होने से ट्रेनों का कुल वजन 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। इसका सीधा असर ट्रेन की रफ्तार और प्रदर्शन पर पड़ेगा।

हल्की बॉडी के कारण नई वंदे भारत ट्रेनें बेहद कम समय में 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड हासिल करने में सक्षम होंगी। साथ ही बिजली की खपत भी कम होगी, जिससे रेलवे को हर साल करोड़ों रुपये की बचत होने की उम्मीद है।

विदेशी निर्भरता खत्म करने की तैयारी

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अब तक विशेष ग्रेड वाले एल्युमिनियम के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे निर्माण लागत काफी बढ़ जाती थी। लेकिन अब रेलवे देश के भीतर ही पूरी मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया को विकसित करने पर जोर दे रहा है।

रेलवे का अनुमान है कि घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से एक ट्रेन सेट की कुल निर्माण लागत में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसका फायदा भविष्य में यात्रियों को भी सस्ते किराए के रूप में मिल सकता है।

तटीय इलाकों में भी लंबे समय तक रहेंगी सुरक्षित

नई एल्युमिनियम तकनीक का सबसे बड़ा फायदा समुद्री इलाकों में चलने वाली ट्रेनों को मिलेगा। मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और ओडिशा जैसे तटीय क्षेत्रों में नम हवाओं के कारण स्टील की ट्रेनों में जल्दी जंग लगने का खतरा रहता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एल्युमिनियम में जंग नहीं लगती, इसलिए ये ट्रेनें 35 से 40 वर्षों तक सुरक्षित और बेहतर स्थिति में बनी रह सकती हैं। इससे रखरखाव का खर्च भी कम होगा।

सुरक्षा के लिए मिलेगा ‘कवच 4.0’ सिस्टम

रेलवे ने नई वंदे भारत ट्रेनों में सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वंदे भारत 3.0 की सभी ट्रेनों में अत्याधुनिक ‘कवच 4.0’ सुरक्षा सिस्टम लगाया जाएगा। यह तकनीक कोहरे या मानवीय गलती की स्थिति में ऑटोमैटिक ब्रेक लगाने में सक्षम होगी।

इसके अलावा एल्युमिनियम बॉडी को यूरोपीय क्रैश-वर्दीनेस मानकों ईएन 15227 के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा अधिकतम स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।

2027 तक परीक्षण पूरा करने का लक्ष्य

रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए समयसीमा भी तय कर दी है। अगस्त 2027 तक स्वदेशी बुलेट ट्रेन बी-28 के लिए एल्युमिनियम तकनीक का परीक्षण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

आने वाले पांच वर्षों में भारतीय रेलवे कम से कम 400 नई वंदे भारत ट्रेनों को इसी हल्की और आधुनिक एल्युमिनियम बॉडी के साथ ट्रैक पर उतारने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती देगा और भारतीय रेलवे को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।

 

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