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महाकुंभ की वायरल मोनालिसा पहुंची हाईकोर्ट, खुद को नाबालिग बताए जाने के खिलाफ दायर की याचिका

जबलपुर : महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर चर्चित हुई मोनालिसा एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। इस बार मामला उसके अंतर्धार्मिक विवाह और उम्र विवाद से जुड़ा हुआ है, जो अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। मोनालिसा और उसके पति फरमान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को नाबालिग बताए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मोनालिसा के जन्म प्रमाण पत्र में कथित तौर पर फर्जी तरीके से बदलाव कर उसकी उम्र कम दिखाई गई, ताकि उसके विवाह को अपराध की तरह प्रस्तुत किया जा सके। साथ ही मामले को “लव जिहाद” जैसे शब्दों से जोड़कर साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

पिता और डीजीपी को बनाया पक्षकार

मोनालिसा ने अपनी याचिका में अपने पिता और मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पक्षकार बनाया है। हाईकोर्ट से मांग की गई है कि सरकारी रिकॉर्ड में कथित जालसाजी की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और उसके मूल जन्म प्रमाण पत्र को बहाल किया जाए।

याचिका में कहा गया है कि उसकी वास्तविक जन्मतिथि के साथ छेड़छाड़ कर रिकॉर्ड बदला गया, जिससे विवाह को अवैध साबित करने और सामाजिक दबाव बनाने की कोशिश की गई।

मार्च में केरल में की थी शादी

याचिका के अनुसार मोनालिसा ने इसी वर्ष मार्च में केरल में फरमान से विवाह किया था। विवाह के बाद मामला तब विवादों में आया जब मोनालिसा के पिता ने उसकी उम्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मोनालिसा को नाबालिग माना था।

इसके बाद मध्यप्रदेश पुलिस ने फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि फरमान को राहत देते हुए केरल हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल को उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

निजता और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

याचिका में कहा गया है कि एक बालिग महिला के निजी फैसले को “लव जिहाद” जैसे शब्दों से जोड़कर अनावश्यक विवाद पैदा किया गया। इससे उसकी निजता और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड की सत्यता की जांच कराने की मांग की है।

हाईकोर्ट में जल्द हो सकती है सुनवाई

सूत्रों के मुताबिक हाईकोर्ट में इस मामले पर आने वाले दिनों में सुनवाई हो सकती है। इस दौरान उम्र निर्धारण, दस्तावेजों की वैधता और पुलिस कार्रवाई समेत कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर बहस होने की संभावना है। फिलहाल यह मामला प्रदेश में अंतर्धार्मिक विवाह, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता को लेकर नई चर्चा का केंद्र बन गया है।

 

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