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‘जंग नहीं, सम्मानजनक बातचीत चाहिए’; ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन का दुनिया को बड़ा संदेश

तेहरान: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लगातार मिल रही अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ संकेत दिया है कि उनका देश युद्ध नहीं बल्कि कूटनीति और संवाद के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि ईरान अब भी शांतिपूर्ण समाधान और सम्मानजनक बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है।

सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में पेजेशकियन ने कहा कि ईरान ने हमेशा अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन किया है और संघर्ष से बचने की हरसंभव कोशिश की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी कूटनीतिक विकल्प अभी भी खुले हैं और स्थायी समाधान केवल सम्मानजनक बातचीत से ही संभव है।

‘दबाव की राजनीति से नहीं निकलेगा समाधान’

ईरानी राष्ट्रपति ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि किसी भी राष्ट्र को ताकत या दबाव के जरिए झुकाने की नीति गलत साबित होती है। उनके मुताबिक ऐसी रणनीतियां लंबे समय तक शांति कायम नहीं रख सकतीं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए आपसी सम्मान और संतुलित कूटनीति बेहद जरूरी है।

अमेरिका की तरफ से भी सख्त संकेत

दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर तीखे बयान दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले की तुलना में कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि अब फैसला यह करना है कि स्थिति को पूरी तरह खत्म किया जाए या किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह बड़े युद्ध के बजाय सीमित तनाव और कम जनहानि वाले विकल्प को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिका ईरान को “एक मौका” देना चाहता है और जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम नहीं उठाना चाहता।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी वैश्विक चिंता

इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में ईरान की ओर से इस रास्ते को ब्लॉक किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट और तेल कीमतों को लेकर डर गहरा गया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।

शांति वार्ता बेनतीजा, युद्धविराम पर खतरा बरकरार

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इस्राइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।

फिलहाल क्षेत्र में बेहद नाजुक युद्धविराम लागू है। खुद ट्रंप ने भी स्वीकार किया है कि यह संघर्षविराम स्थायी नहीं माना जा सकता। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर दोबारा युद्ध की स्थिति बनी तो अमेरिका और उसके सहयोगियों को पहले से ज्यादा कड़ा जवाब दिया जाएगा।

आर्थिक दबाव के बीच संतुलित रणनीति

विश्लेषकों का मानना है कि कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद ईरान खुद को बातचीत समर्थक देश के तौर पर पेश करने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं अमेरिका भी सैन्य दबाव बनाए रखते हुए सीमित समझौते की संभावना खुली रखना चाहता है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक तेल बाजार दोनों की दिशा इसी तनाव और बातचीत पर निर्भर करेगी।

 

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