Wednesday, June 10, 2026
बिजनेस

एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका! स्टारलिंक की एंट्री पर लगी ब्रेक, सुरक्षा एजेंसियों ने रोकी अंतिम मंजूरी

नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार की सुरक्षा एजेंसियों ने कंपनी को अंतिम परिचालन मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि ईरान में युद्ध के दौरान स्टारलिंक टर्मिनलों के इस्तेमाल को लेकर उठी सुरक्षा चिंताओं के बाद यह फैसला लिया गया है।

केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं के संचालन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने कई अहम आपत्तियां दर्ज की हैं। इन्हीं चिंताओं के चलते स्टारलिंक की मंजूरी प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। इससे भारत में कंपनी की बहुप्रतीक्षित एंट्री पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

ईरान युद्ध बना चिंता की बड़ी वजह

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का मुख्य कारण ईरान में स्टारलिंक टर्मिनलों का इस्तेमाल है। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच तनावपूर्ण हालात के दौरान ईरान में इंटरनेट प्रतिबंधों के बावजूद स्टारलिंक टर्मिनलों के जरिए इंटरनेट सेवाएं जारी रहीं। खास बात यह रही कि कंपनी के पास ईरान में संचालन का आधिकारिक लाइसेंस भी नहीं था।

इसी घटना के बाद भारतीय एजेंसियों ने इस बात पर चिंता जताई कि किसी भू-राजनीतिक संकट या आंतरिक अशांति के दौरान ऐसी तकनीक को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। यदि सरकार इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाए और वह प्रभावी न हो सके, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

विदेशी नियंत्रण को लेकर भी उठे सवाल

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि स्टारलिंक का स्वामित्व अमेरिका स्थित कंपनी के पास होने के कारण संवेदनशील परिस्थितियों में उसके संचालन और नियंत्रण से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और संचार नियंत्रण से जुड़े पहलुओं को देखते हुए एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।

चीन के बाद भारत में भी बढ़ीं मुश्किलें

भारत के इस फैसले ने स्टारलिंक के वैश्विक विस्तार को बड़ा झटका दिया है। कंपनी पहले ही चीन जैसे बड़े बाजार में प्रवेश नहीं कर पाई है और अब दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में भी उसका विस्तार अधर में लटकता नजर आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का रुख यह संकेत देता है कि रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सरकार विदेशी तकनीकी कंपनियों के प्रति बेहद सतर्क नीति अपनाने जा रही है। ऐसे में स्टारलिंक को भारत में सेवाएं शुरू करने के लिए आगे और कड़ी जांच एवं मंजूरी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है।

 

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