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कोरोना के नए वैरिएंट BA.3.2 पर बढ़ी निगरानी, भारत में अब तक नहीं मिला एक भी मामला; वैज्ञानिकों ने दी अहम सलाह

नई दिल्ली: कोविड-19 के नए वैरिएंट BA.3.2 को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक सतर्क हैं। शुरुआती अध्ययनों में इस वैरिएंट में बड़ी संख्या में आनुवंशिक बदलाव पाए गए हैं, जिससे इसके पहले के संक्रमण या वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा पर कुछ हद तक असर डालने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है कि यह वैरिएंट पहले के मुकाबले अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है। भारत में फिलहाल BA.3.2 संक्रमण का कोई आधिकारिक मामला दर्ज नहीं हुआ है।

स्पाइक प्रोटीन में मिले कई नए बदलाव

रिपोर्टों के अनुसार, BA.3.2 वैरिएंट में JN.1 की तुलना में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन और डिलीशन दर्ज किए गए हैं। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच डेनमार्क, जर्मनी और नीदरलैंड में किए गए जीनोमिक विश्लेषण के दौरान कुछ नमूनों में इस वैरिएंट की पहचान हुई थी।

इसके अलावा अमेरिका के कई राज्यों में मरीजों के नमूनों, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच और वेस्टवॉटर सर्विलांस के दौरान भी BA.3.2 की मौजूदगी दर्ज की गई है।

क्या मौजूदा वैक्सीन का असर होगा कम?

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मौजूदा कोविड-19 वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी नहीं रहेगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, BA.3.2 में इम्यून एस्केप यानी शरीर की प्रतिरक्षा से आंशिक रूप से बच निकलने की क्षमता हो सकती है, लेकिन अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य यह नहीं बताते कि वैक्सीन गंभीर संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु से सुरक्षा देना बंद कर देगी। इस वैरिएंट के व्यवहार और प्रभाव पर लगातार अध्ययन जारी है।

सब-वैरिएंट BA.3.2.1 और BA.3.2.2 पर भी नजर

वैज्ञानिक BA.3.2 के साथ-साथ इसके संभावित उप-वैरिएंट BA.3.2.1 और BA.3.2.2 की भी निगरानी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जीनोमिक सीक्वेंसिंग और वेस्टवॉटर सर्विलांस जैसी प्रणालियां भविष्य में नए वैरिएंट की समय रहते पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। फिलहाल वैज्ञानिकों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क निगरानी जारी रहनी चाहिए।

आंध्र प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी

इस बीच आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोविड-19 संक्रमण के कुछ नए मामले सामने आने और दो संक्रमित मरीजों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों के मुताबिक, आरटी-पीसीआर जांच में कई लोग संक्रमित पाए गए हैं। अधिकांश मरीजों में हल्के लक्षण हैं और उनका उपचार होम आइसोलेशन या चिकित्सकीय निगरानी में किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों से अतिरिक्त नमूने एकत्र कर जांच शुरू कर दी है और संक्रमण की श्रृंखला पर लगातार नजर रखी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को सर्दी, खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच कराएं और आवश्यक सावधानियों का पालन करें। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

फिलहाल भारत में BA.3.2 वैरिएंट का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आ रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

 

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