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काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद में समाधान की नई पहल, 14 जुलाई को मध्यस्थता बैठक और अगस्त में विशेष लोक अदालत

 

वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के समाधान की दिशा में नई पहल शुरू होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के उद्देश्य से 14 जुलाई को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में हिंदू और मुस्लिम पक्ष के वादी तथा उनके अधिवक्ता शामिल होंगे।

इसके बाद 21 से 23 अगस्त तक तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जहां दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर विवाद के समाधान की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। शीर्ष अदालत को उम्मीद है कि आपसी संवाद के माध्यम से किसी सकारात्मक निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है।

14 जुलाई को होगी मध्यस्थता की पहली बैठक

मामले से जुड़े अधिवक्ता पंडित सुधीर त्रिपाठी के अनुसार, ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मामलों के मध्यस्थता के जरिए समाधान के लिए जिला स्तर पर नोटिस जारी किए गए हैं। नौ जुलाई को सभी संबंधित पक्षों को सूचना भेजी गई थी और अब 14 जुलाई को मध्यस्थता केंद्र में बैठक प्रस्तावित है।

उन्होंने कहा कि यदि बातचीत से सहमति नहीं बनती है तो मामले की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे जारी रहेगी।

मंदिर और मस्जिद पक्ष के अपने-अपने दावे

हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी परिसर में पहले प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित था, जिसे वर्ष 1669 में मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में ध्वस्त कर उसके अवशेषों पर मस्जिद का निर्माण कराया गया। अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी का कहना है कि एएसआई सर्वे के दौरान मंदिर से जुड़े अवशेष मिलने की बात सामने आई है। उनका यह भी कहना है कि यदि परिसर मंदिर पक्ष को सौंपा जाता है तो वे दूसरे पक्ष के खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई या जुर्माने की मांग नहीं करेंगे।

वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि संबंधित भूमि वक्फ बोर्ड की है और यहां लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है। उनका कहना है कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं तो उसके आधार पर अदालत आगे का निर्णय ले सकती है।

डेढ़ वर्ष बाद फिर तेज हुई समाधान की प्रक्रिया

ज्ञानवापी विवाद के समाधान को लेकर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मध्यस्थता केंद्र प्रभारी जज राजीव मुकुल पांडेय की अध्यक्षता में बैठक होगी। इस पहल के बाद करीब डेढ़ वर्ष से लंबित समाधान प्रक्रिया में नई गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।

इससे पहले 12 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी से संबंधित नए मुकदमे दर्ज करने और स्वीकार करने पर रोक लगा दी थी। साथ ही केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष दाखिल करने को कहा था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि पहले से लंबित मामलों की सुनवाई जारी रहेगी।

बैठक में 30 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना

मध्यस्थता केंद्र में प्रस्तावित बैठक में ज्ञानवापी से जुड़े चार मामलों के वादी, प्रतिवादी और उनके अधिवक्ताओं सहित 30 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है। बैठक की अध्यक्षता मध्यस्थता केंद्र के प्रभारी जज करेंगे, जबकि जिला जज भी निगरानी के लिए मौजूद रह सकते हैं।

बैठक में विभिन्न पक्षों के अधिवक्ताओं, जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और संबंधित पक्षों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के अधिवक्ताओं ने नोटिस मिलने से इनकार किया है।

मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस आदेश की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि अदालत की ओर से ऐसा निर्देश दिया गया है तो संबंधित समिति इस पर विचार करेगी और आपसी सहमति के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

वहीं, वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि उन्हें मध्यस्थता केंद्र से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। दूसरी ओर, अधिवक्ता एवं पक्षकार मुख्तार अहमद अंसारी ने विशेष लोक अदालत की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तब इस तरह की पहल से पहले उस पर निर्णय होना चाहिए।

 

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