‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ का संकल्प! श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज में छात्रों ने दिया जागरूकता का संदेश

गोंडा: माननीय प्रधानमंत्री के राष्ट्रव्यापी संकल्प के तहत श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के ललिता शास्त्री सभागार में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रभारी प्राचार्य प्रो. जितेंद्र सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करना और समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रेरित करना रहा।

नशा पीड़ितों से घृणा नहीं, सहयोग का भाव रखें
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों से घृणा करने के बजाय उनके प्रति सहानुभूति का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को नशा मुक्त करने में समाज की भागीदारी आवश्यक है और प्रत्येक नागरिक को विकसित भारत के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
नशा पूरे परिवार और समाज को करता है प्रभावित
कार्यक्रम संयोजक डॉ. रेखा शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि नशे की लत केवल व्यक्ति का जीवन ही नहीं बिगाड़ती, बल्कि माता-पिता के सपनों को तोड़ती है, बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बनाती है और परिवार के साथ-साथ पूरे समाज को भी प्रभावित करती है। उन्होंने सभी से नशा मुक्त भारत अभियान में सक्रिय सहयोग देने की अपील की।

भाषण और पोस्टर प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाई प्रतिभा
कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्ति विषय पर भाषण एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भाषण प्रतियोगिता में मानसी सिंह ने प्रथम, संदीप तिवारी ने द्वितीय और मोहम्मद जैद ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं पोस्टर प्रतियोगिता में मेहविश मिराज प्रथम, राज द्वितीय और कमलवासनी तिवारी तृतीय स्थान पर रहीं।
कई शिक्षकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम का संचालन एनसीसी प्रभारी डॉ. अमित शुक्ला ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. चमन कौर ने दिया। प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका डॉ. चमन कौर, डॉ. संतोष श्रीवास्तव और डॉ. मनोज मिश्रा ने निभाई। कार्यक्रम के सफल आयोजन में एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पवन सिंह, डॉ. परवेज आलम, डॉ. दिलीप शुक्ला, डॉ. दलीप सिंह, डॉ. संजय कुमार, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव और डॉ. अमित दुबे का उल्लेखनीय सहयोग रहा।
