जयशंकर का दो टूक संदेश- रूसी तेल खरीदना हो या रोकना, इससे नहीं खत्म होगा यूक्रेन युद्ध; बोले- संवाद और कूटनीति ही रास्ता
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का समाधान किसी देश के रूसी तेल खरीदने या उसे रोकने से नहीं निकलेगा। युद्ध खत्म करने का रास्ता संवाद, कूटनीति और गंभीर बातचीत से होकर गुजरता है।
जयशंकर ने कहा कि भारत यूक्रेन संकट का समाधान तलाशने और संघर्ष खत्म करने के प्रयासों में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन का अपना दृष्टिकोण है और भारत उसका सम्मान करता है। साथ ही भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों और करीब 1.4 अरब आबादी की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

रूसी तेल खरीद पर भारत का पुराना रुख बरकरार
रूस से तेल खरीदने का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से भारत और पश्चिमी देशों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय रहा है। वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा। अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से भारत की इस नीति पर सवाल उठते रहे हैं, जबकि नई दिल्ली का कहना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी बड़े बदलाव आए। रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने और पारंपरिक आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव के बीच रूसी तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग परिस्थितियों के साथ उपलब्ध हुआ। भारत ने अपनी जरूरत, कीमत और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले किए।
ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा भारत
अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंध या शुल्क लगाए जाने के सवाल पर भी जयशंकर ने भारत की प्राथमिकता स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा स्थिति चुनौतीपूर्ण है और भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।
जयशंकर ने संकेत दिया कि किसी एक व्यापारिक फैसले को रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान का आधार नहीं बनाया जा सकता। भारत का मानना है कि संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।
कीव में जेलेंस्की और यूक्रेनी विदेश मंत्री से मुलाकात
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जयशंकर तीन दिवसीय यूक्रेन और पोलैंड यात्रा पर हैं। कीव में उन्होंने राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि युद्ध के मैदान में समाधान तलाशने के बजाय बातचीत के जरिए विवाद का रास्ता निकाला जाना चाहिए।
कीव हमले में भारतीय नागरिक की मौत का भी जिक्र
जयशंकर ने कीव में हालिया हमले का भी उल्लेख किया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हुई थी। उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना जताई और प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की। भारत संघर्ष के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पहले भी अपनी चिंता जाहिर करता रहा है।
काला सागर में जहाजों पर हमले और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के साथ बातचीत में काला सागर में व्यावसायिक जहाजों पर हो रहे हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। जयशंकर ने कहा कि भारतीय नाविक दुनिया के अलग-अलग देशों के वाणिज्यिक जहाजों पर काम करते हैं और समुद्री मार्गों पर होने वाले हमलों का असर उन पर भी पड़ता है।
भारत का कहना है कि नागरिकों और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। समुद्री मार्गों में बाधा का असर केवल जहाजों और चालक दल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ईंधन, खाद्य पदार्थ और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से भारत युद्ध से जुड़े व्यापक मानवीय और आर्थिक प्रभावों को देखते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान पर जोर दे रहा है।

