भारतीयों पर दोहरी मार! अमेरिका में ग्रीन कार्ड की राह और कठिन, खाड़ी संकट ने भी बढ़ाई चिंता; जानें क्या है आगे का रास्ता
वाशिंगटन/दुबई: अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिया है कि भारी मांग के चलते भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार आधारित पहली प्राथमिकता वाली ईबी-1 श्रेणी के ग्रीन कार्ड आने वाले हफ्तों में अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं रह सकते। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा, यात्रा और रोजगार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ईबी-1 श्रेणी पर खत्म हो सकता है भारत का वार्षिक कोटा

अमेरिकी विदेश विभाग के सितंबर के वीजा बुलेटिन के अनुसार, भारतीय आवेदकों की बड़ी संख्या के कारण वित्त वर्ष के 30 सितंबर को समाप्त होने से पहले भारत के लिए ईबी-1 श्रेणी में उपलब्ध वीजा संख्या खत्म होने की आशंका है। विभाग वीजा उपलब्धता पर लगातार नजर रख रहा है और परिस्थितियों के अनुसार वीजा संख्या तथा प्राथमिकता तारीखों में बदलाव किया जा सकता है।
ईबी-1 श्रेणी में आम तौर पर असाधारण क्षमता वाले पेशेवर, प्रतिष्ठित शोधकर्ता और प्रोफेसर तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अधिकारी शामिल होते हैं। भारतीय पेशेवरों के बीच इस श्रेणी के ग्रीन कार्ड की मांग काफी अधिक रहती है।
अक्टूबर 2022 तक की प्राथमिकता तारीख वाले आवेदकों को मौका
सितंबर के लिए भारत की ईबी-1 श्रेणी की अंतिम कार्रवाई तारीख 15 अक्टूबर 2022 तय की गई है। इसका अर्थ है कि सामान्य परिस्थितियों में उन्हीं भारतीय आवेदकों के मामलों पर अंतिम कार्रवाई की जा सकती है, जिनकी प्राथमिकता तारीख 15 अक्टूबर 2022 से पहले की है।
नई प्राथमिकता तारीख वाले आवेदकों को इसके चलते और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, वीजा उपलब्धता में बदलाव होने पर आने वाले महीनों में इन तारीखों में भी बदलाव संभव है।
खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीयों की बढ़ी चिंता
अमेरिका में ग्रीन कार्ड की चुनौती के बीच खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के सामने अलग तरह की परेशानी खड़ी हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर और सऊदी अरब में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीय प्रवासियों की चिंताओं पर पड़ा है।
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पश्चिम एशिया में फिर से युद्ध जैसे हालात बनने के बाद अमेरिका ने क्षेत्र के लिए दूसरी सबसे ऊंची श्रेणी की यात्रा चेतावनी जारी की है। वहीं, यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के लिए अपनी विमानन चेतावनी को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है।
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा तो क्या होगा असर?
क्षेत्र में तनाव बढ़ने की स्थिति में हवाई यात्रा, कारोबार और लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, इसलिए किसी बड़े सैन्य टकराव का असर उनके रोजगार, यात्रा और सुरक्षा पर पड़ने की आशंका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि एक महीने की शांति खत्म होने की वजह ईरान की ओर से अपने रडार और मिसाइल प्रणालियों को दोबारा तैयार करने की कोशिश थी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेनाएं एक और हमले के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, ईरान की ओर से भी लगातार जवाबी हमले किए जाने की बात कही गई है।
भारतीयों के लिए दोनों मोर्चों पर स्थिति अहम
मौजूदा हालात भारतीयों के लिए दो स्तरों पर महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वालों को ईबी-1 वीजा की उपलब्धता और प्राथमिकता तारीखों में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। वहीं, खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और उड़ानों से जुड़े घटनाक्रम अहम रहेंगे।
अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के साथ-साथ व्यापार और हवाई यात्रा पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों के लिए आने वाले वीजा बुलेटिन यह तय करेंगे कि उनकी प्रतीक्षा अवधि आगे कितनी बढ़ती है।

