फर्जी कंपनियों से हवाला तक, FATF रिपोर्ट में भारतीय एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई का खुलासा; ऐसे सामने आया करोड़ों का खेल
नई दिल्ली: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की हाल में प्रकाशित रिपोर्ट में भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के ऐसे नेटवर्क का जिक्र किया गया है, जिनमें फर्जी कंपनियों, जाली व्यापारिक दस्तावेजों और अनौपचारिक धन हस्तांतरण के माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जांच एजेंसियों ने ऐसे आपराधिक नेटवर्क का पता लगाया, जो काले धन को सीमा पार भेजने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे।
हवाला और भूमिगत बैंकिंग बनी अपराधियों की बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार, भूमिगत बैंकिंग, हवाला और इसी तरह की गैर-पंजीकृत वित्तीय सेवाएं पेशेवर तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले आपराधिक समूहों के लिए अहम माध्यम बन चुकी हैं। FATF को जानकारी देने वाले करीब 80 प्रतिशत देशों ने इन प्रणालियों को अपने यहां मनी लॉन्ड्रिंग के प्रमुख तरीकों में शामिल किया है। कुछ मामलों में कुछ ही महीनों के भीतर इन माध्यमों से 500 मिलियन यूरो तक की रकम स्थानांतरित किए जाने का भी पता चला।
FATF की केस स्टडी में भारत के दो मामले
FATF की रिपोर्ट में भारत से जुड़े दो मामलों को केस स्टडी के तौर पर शामिल किया गया है। इनमें पहला मामला फर्जी व्यापार और शेल कंपनियों के जरिए धन की हेराफेरी से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला अवैध ऑनलाइन जुआ मंच के माध्यम से रकम के हस्तांतरण से संबंधित है।
पहला मामला: शेल कंपनियों के जरिए विदेश भेजा गया पैसा
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2022 में भारतीय अधिकारियों ने ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया था, जिसका पूरा ढांचा शेल कंपनियों पर आधारित था। जांच में सामने आया कि इन कंपनियों का कोई वास्तविक कारोबार नहीं था या उनका कारोबार केवल नाममात्र का था। कई कंपनियां डमी लोगों के नाम पर या चोरी किए गए दस्तावेजों के सहारे बनाई गई थीं।
जांच के दौरान पता चला कि इस नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों ने वास्तविक सामान का आयात किया, लेकिन सीमा शुल्क दस्तावेजों में उसकी कीमत काफी कम दर्शाई गई। इसके चलते विदेश में बड़ी रकम का भुगतान बकाया दिखाया गया। इसके बाद घरेलू शेल कंपनियों ने जाली आयात दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अतिरिक्त रकम भारत से बाहर भेजी। रकम को इस तरह स्थानांतरित किया गया कि लेनदेन देखने में सामान्य कारोबारी भुगतान जैसा लगे।
गोलमाल व्यापार से छिपाई गई रकम और सामान की असली जानकारी
जांच में इस नेटवर्क द्वारा सर्कुलर ट्रेड यानी एक ही कारोबारी समूह से जुड़ी कंपनियों के बीच सामान और भुगतान घुमाने का तरीका अपनाने की बात भी सामने आई। इसमें सामान पहले किसी तीसरे देश में संबंधित कंपनी को भेजा जाता था। इसके बाद कारोबारी विवाद का हवाला देकर भुगतान रोक दिया जाता था। फिर वही सामान समूह से जुड़ी किसी दूसरी कंपनी को भेज दिया जाता था। इस प्रक्रिया के जरिए सामान की वास्तविक कीमत और उसके अंतिम ठिकाने को छिपाने की कोशिश की जाती थी।
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दूसरा मामला: अवैध ऑनलाइन जुआ मंच से धन का खेल
FATF की दूसरी केस स्टडी भारत में अवैध ऑनलाइन जुआ मंच से संबंधित है। इन मंचों पर ताश सहित विभिन्न खेलों पर दांव लगाए जाते थे। जांच अधिकारियों के मुताबिक, इन मंचों ने उपयोगकर्ताओं से पैसा जमा कराने और जीत की रकम वापस पहुंचाने के लिए पैनल संचालकों का एक विशेष नेटवर्क बनाया था।
इस नेटवर्क में यूपीआई, नेट बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और चोरी की पहचान के दस्तावेजों से खोले गए बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इस तरीके से हासिल रकम के एक हिस्से को पहले नकदी में बदला गया और फिर हवाला के जरिए विदेश भेज दिया गया।
UAE से निवेश के रूप में वापस आया पैसा
जांच में यह भी सामने आया कि विदेश भेजी गई रकम बाद में संयुक्त अरब अमीरात से वैध विदेशी निवेश के रूप में भारत वापस लाई गई। इस तरह अवैध तरीके से हासिल धन को वैध निवेश का रूप देने की कोशिश की गई।
डिजिटल हवाला ने जांच एजेंसियों के सामने बढ़ाई चुनौती
FATF ने अपनी रिपोर्ट में डिजिटल हवाला के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अनौपचारिक वित्तीय प्रणालियां कई बार प्रवासी श्रमिकों की वास्तविक धन भेजने की जरूरत पूरी करती हैं, लेकिन बिना लाइसेंस के हवाला सेवा संचालित करना अपराध है।
कुछ जांचों में यह सामने आया है कि हवाला संचालक अब सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले मंचों का इस्तेमाल कर अपने नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मंचों के जरिए नेटवर्क चलाए जाने के मामलों ने अवैध धन के सीमा पार हस्तांतरण की निगरानी और जांच को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

