Thursday, September 24, 2026
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बीबीएयू में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष व्याख्यान, वायु-जल प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक के खतरों से कराया अवगत

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 23 सितंबर को हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ के तहत ‘सप्त दिवसीय हिंदी कार्यशाला’ में ‘पर्यावरण संरक्षण में युवाओं/समाज की भूमिका’ विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ। कार्यक्रम में बीबीएयू के पर्यावरणीय सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग के प्रो. राम चंद्रा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव और डॉ. संध्या दीक्षित भी मौजूद रहीं।

अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन समिति की ओर से मुख्य वक्ता प्रो. राम चंद्रा को अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं आभार व्यक्त करने के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में युवाओं और समाज की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

वायु प्रदूषण और एयर क्वालिटी इंडेक्स की दी जानकारी

प्रो. राम चंद्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने एयर क्वालिटी इंडेक्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वायु की गुणवत्ता को कैसे मापा जाता है और इसका मानव स्वास्थ्य पर किस तरह प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने वायु प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दिया।

जल की अशुद्धियों और प्रदूषण के प्रभाव समझाए

व्याख्यान के दौरान प्रो. राम चंद्रा ने जल की शुद्धता और गुणवत्ता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने जल में मौजूद अस्थायी और स्थायी अशुद्धियों तथा उनके प्रभावों के बारे में जानकारी दी।

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उन्होंने बताया कि जल प्रदूषण का असर केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जलीय और अन्य जीव-जंतुओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

माइक्रोप्लास्टिक को बताया गंभीर चुनौती

प्रो. राम चंद्रा ने माइक्रोप्लास्टिक से होने वाले दुष्प्रभावों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माइक्रोप्लास्टिक पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य और जलीय जीवों के लिए भी गंभीर चुनौती है।

उन्होंने जल प्रदूषण के कारण मानव जीवन और जीव-जगत पर पड़ने वाले दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए युवाओं और समाज से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील की।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय योगदान की अपील

मुख्य वक्ता ने युवाओं और समाज से जल, वायु और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए व्यक्तिगत जागरूकता के साथ सामूहिक प्रयास भी जरूरी हैं।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. संध्या दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षक, गैर-शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

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