Friday, September 25, 2026
खेल

नागोया एशियाई खेलों में भारत के 17 मेडल, लेकिन गोल्ड सिर्फ 1; हांगझोउ के 106 पदकों के बाद बदली उम्मीदों के बीच बड़ी चुनौती

नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में 24 सितंबर तक भारत के खाते में कुल 17 मेडल आ चुके हैं, लेकिन इनमें गोल्ड सिर्फ एक है। भारत ने 7 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल भी जीते हैं। कुल पदकों की संख्या को देखें तो तस्वीर सामान्य लग सकती है, लेकिन मेडल टैली में भारत 14वें स्थान पर है। यही स्थिति भारतीय खेल व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर रही है। नागोया एशियन गेम्स की तैयारी के लिए पिछले तीन साल में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, उपकरण, कोचिंग और विशेषज्ञ सेवाओं पर 702.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के तहत 97.84 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस तरह कुल सरकारी निवेश करीब 800.70 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।

महिला क्रिकेट ने दिलाया भारत का एकमात्र गोल्ड

नागोया में भारत का एकमात्र गोल्ड महिला क्रिकेट टीम ने जीता है। भारतीय टीम ने श्रीलंका को 147 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद भारत के खाते में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल तो आए, लेकिन गोल्ड की संख्या में इजाफा नहीं हो सका।

यही आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 106 मेडल जीते थे। इनमें 28 गोल्ड, 38 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे। भारत उस प्रदर्शन के साथ मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा था।

हांगझोउ के बाद बढ़ीं भारतीय खेलों से उम्मीदें

हांगझोउ में पहली बार भारत ने 100 से ज्यादा पदक जीते थे। इसके बाद एशियन गेम्स में भारतीय प्रदर्शन को उसी पैमाने पर देखा जा रहा है। हालांकि नागोया एशियन गेम्स अभी खत्म नहीं हुए हैं, इसलिए अंतिम मेडल टैली आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। भारत के कई खेलों में मुकाबले अभी बाकी हैं और आने वाले दिनों में पदकों की संख्या बढ़ सकती है।

501 खिलाड़ियों का दल, 800 करोड़ से ज्यादा का सरकारी निवेश

नागोया एशियन गेम्स के लिए भारत ने 501 खिलाड़ियों का दल उतारा है। इनमें 310 खिलाड़ी पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। टीम के साथ 265 सदस्यीय सपोर्ट स्टाफ भी मौजूद है।

तैयारी पर हुए खर्च में अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर पर 251.4 करोड़ रुपये, घरेलू ट्रेनिंग पर 118.3 करोड़ रुपये, उपकरणों पर 89.2 करोड़ रुपये, विदेशी विशेषज्ञों पर 86.3 करोड़ रुपये और विदेशी ट्रेनिंग पर 39.8 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन आंकड़ों से तैयारी के बड़े स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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गोल्ड मेडल बढ़ाने की चुनौती

भारत की चुनौती सिर्फ कुल पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग खेलों में गोल्ड जीतने की क्षमता को मजबूत करना भी अहम है। हांगझोउ में शूटिंग और एथलेटिक्स ने भारत को बड़ी संख्या में पदक दिलाए थे।

हांगझोउ में एथलेटिक्स से भारत को 29 और शूटिंग से 22 पदक मिले थे। शूटिंग में भारत ने 7 गोल्ड, जबकि एथलेटिक्स में 6 गोल्ड जीते थे। नागोया में शुरुआती चरण में इन खेलों से वैसी गोल्ड बढ़त दिखाई नहीं दी है।

चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से भी आगे निकलने की चुनौती

मेडल टैली में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भारत से आगे हैं। हांगझोउ में भी भारत इन देशों के बाद चौथे स्थान पर रहा था। ऐसे में नागोया भारत के लिए सिर्फ पदकों की कुल संख्या बढ़ाने का मंच नहीं है, बल्कि अलग-अलग खेलों में मजबूत प्रदर्शन की क्षमता को परखने का अवसर भी है।

एशियन गेम्स में प्रदर्शन लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नागोया गेम्स के अंतिम आंकड़े आने के बाद तस्वीर साफ होगी कि भारत कुल कितने मेडल जीतता है और उनमें गोल्ड की हिस्सेदारी कितनी रहती है।

 

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