6TH UTTAR PRADESH SPICES CONFERENCE & EXPO 2026: उत्पादन से आगे मूल्य संवर्धन, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की मसाला अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से आज उद्यान भवन, लखनऊ में ‘छठे उत्तर प्रदेश स्पाइस कान्फ्रेन्स और एक्सपो 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उद्यान विभाग के वरिष्ठअधिकारियों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, मसाला व्यापारियों, निर्यातकों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और उद्योग विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। इस सम्मेलन का आयोजन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (CARD) द्वारा किया गया, जिसमें ‘3EA ग्लोबल’ ने नॉलेज पार्टनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उत्तर प्रदेश औद्यानिक उत्पादन में देश में प्रथम: माननीय उद्यान मंत्रीसम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए माननीय उद्यान मंत्री, श्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज 4 करोड़ टन औद्यानिक उत्पादन के साथ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है, जो राज्य के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने रेखांकित किया कि मसाला भारतीय व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया:
- मिलावट पर अंकुश:वैश्विक बाजार में राज्य के उत्पादों की साख मजबूत करने के लिए मिलावट पर पूर्ण अंकुश लगाना अनिवार्य है। विश्वसनीयता बढ़ाकर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सकता है।
- कृषि विविधीकरण:भूमि की सीमित उपलब्धता को देखते हुए किसानों को कृषि विविधीकरण अपनाना चाहिए। मसालों की खेती कम क्षेत्रफल में भी अधिक मूल्य दिलाने में सक्षम है।
- उद्योगों को अनुदान:मंत्री जी ने उद्यमियों को आमंत्रित करते हुए घोषणा की कि सरकार प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए 35 से 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है, जिससे मूल्य संवर्धन (Value Addition) को गति मिले।
- कच्चे माल में आत्मनिर्भरता:मसाला उद्योगपतियों से अपील की गई कि वे किसानों से सीधे उत्पादन कराएं ताकि राज्य में कच्चे माल की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित हो सके।
- लखनऊ में नया ‘एग्री मॉल’:राजधानी लखनऊ में नवनिर्मित आधुनिक ‘एग्री मॉल’ में जैविक (ऑर्गेनिक) उत्पादों और मसालों के विपणन हेतु विशेष स्थान आरक्षित किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को प्रमाणित और शुद्ध उत्पाद प्राप्त हो सकें।
उद्घाटन सत्र में निदेशक उद्यान श्री भानु प्रकाश राम, संयुक्त निदेशक डॉ. सर्वेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव कुमार वर्मा, IACC/ICFA के श्री मुकेश बहादुर सिंह, और स्पाइसेस बोर्ड के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
मूल्य संवर्धन (Value Addition) और निर्यात के अवसरवैश्विक मसाला व्यापार में भारत की मजबूत स्थिति का जिक्र करते हुए स्पाइसेस बोर्ड के आंकड़े प्रस्तुत किए गए। भारत ने 2025-26 में 39,140.11 करोड़ रुपये (US$4.43 बिलियन) मूल्य के 17.34 लाख टन मसालों का निर्यात किया है।
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3EA ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डॉ. विभोर मिश्रा ने रणनीति प्रस्तुत करते हुए कहा कि मसाला क्षेत्र का मूल्यांकन केवल उत्पादन की मात्रा से नहीं, बल्कि प्रति किलोग्राम और प्रति हेक्टेयर उत्पन्न आर्थिक मूल्य से किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कच्चे माल के बजाय प्रसंस्कृत सामग्री, मसाला तेल, ओलियोरेसिन (Oleoresins) और ब्रांडेड उत्पादों की ओर बढ़ने का यह सही समय है।
गुणवत्ता, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकसम्मेलन के तकनीकी सत्रों में अडानी स्पाइसेस, राकेश मसाला, एमडीएच (MDH), गोल्डी स्पाइसेस, CSIR-CIMAP, और BBAU जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों, खाद्य सुरक्षा और ट्रेसेबिलिटी (Traceability) को पूरा करना आवश्यक है। यह गुणवत्ता आश्वासन खेत से शुरू होकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स तक जारी रहना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में लखनऊ के शेफ्स द्वारा एक कुकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। सम्मेलन का समापन इस स्पष्ट दिशा-निर्देश के साथ हुआ कि मसाला क्षेत्र को अब केवल मात्रा के बजाय मूल्य संवर्धन, डेटा-आधारित निर्णयों और मजबूत मार्केट लीडरशिप की ओर बढ़ना होगा।

