आम आदमी ने तोड़ा आम आदमी का अहंकार

दिनेश दीनू


यहां जितने विधायक बैठे हैं, मैं उन सभी से हाथ जोड़कर कहूंगा कि घमंड में कभी मत आना। अहंकार मत करना। आज हम लोगों ने भाजपा और कांग्रेस वालों का अहंकार तोड़ा है। कल कहीं ऐसा न हो कि किसी आम आदमी को खड़ा होकर हमारा अहंकार तोड़ना पड़े। ऐसा न हो कि जिस चीज को बदलने हम चले थे, कहीं हम उसी का हिस्सा हो जायें। यह उस भाषण का हिस्सा है जो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा 2०13 का चुनाव परिणाम आने के बाद जंतर-मंतर पर पार्टी के सभी विधायकों और समर्थकों को संबोधित करते हुए दिया था।

इस बयान की उम्र चार साल से ऊपर हो गयी है। बयान ठहरा हुआ पानी हो गया है। तभी तो अरविंद केजरीवाल पर यह आरोप लग रहा है कि वह उसी राजनीति के हिस्सा हो गये हैं जिसे वह बदलने चले थे। हाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए प्रत्याशियों के चुनाव की प्रक्रिया और आप के 2० विधायकों को चुनाव आयोग द्बारा अयोग्य करार दिये जाने से अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के उसी चेहरे को साफ करने का काम किया है।

इसे भी पढ़िए: ‘द लखनऊ ट्रिब्यून’ को बधाइयों का तांता, हर कोई दे रहा शुभकामनाएं

21 विधायकों का मामला लाभ के पद का था। 67 विधायकों वाली आम आदमी पार्टी ने मंत्री बनाए। इसके बाद चहेते 21 विधायकों को 13 मार्च 2०15 के आदेश से संसदीय सचिव नियुक्त कर दिया। अरविंद केजरीवाल के बतौर मुख्यमंत्री इस आदेश को नौजवान अधिवक्ता प्रशांत पटेल ने लाभ के पद का मुद्दा उठाते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से शिकायत करते हुए कहा कि ये विधायक लाभ के पद पर हैं, इसलिए उन्हें अयोग्य ठहराया जाये।

इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने पैतरा बदलते हुए अपने इन विधायकों को बचाने के लिए दिल्ली विधानसभा में विधायक, हटाना और अयोग्यता, संशोधन बिल 2०15 पेश किया। इस बिल में संसदीय सचिवों को लाभ के पद के दायरे से पिछली तारीख से बाहर रखने का प्रावधान था। यह बिल राष्ट्रपति भवन पहुंचा तो राष्ट्रपति ने इस विधेयक को नामंजूर करते हुए पूरा मामला चुनाव आयोग के पास भेज दिया।

इसे भी पढ़िए: जब भगवा राज ख़त्म होगा तब क्या होगा

21 विधायकों का मामला 2० विधायकों तक सिमट गया जब पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए जनरैल सिंह ने इस्तीफा दे दिया। चुनाव आयोग ने मार्च 2०16 से इस मामले की परत खोलने का काम शुरू किया और 19 जनवरी 2०18 वह कालखंड बन गया जिस दिन इन विधायकों को अयोग्य घोषित करार दे दिया गया। अरविंद केजरीवाल के जिस भाषण का जिक्र है, उसमें कहा गया है कि कल कहीं ऐसा न हो कि किसी आम आदमी को खड़ा होकर हमारा अहंकार तोड़ना पड़े। अधिवक्ता प्रशांत पटेल वहीं आम आदमी हैं जिन्होंने अरविंद केजरीवाल के सामने खड़े होकर उनका अहंकार तोड़ा है।

इस पूरे घटनाक्रम में एक बात सिर उठा रही है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त अचल कुमार जोती इतनी जल्दी में क्यों थे कि अपने रिटायर्मेंट से दो दिन पहले फैसला दे दिया। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस ओर ध्यान खींचा है। आरोप-प्रत्यारोप होता रहेगा लेकिन अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिदã यह घूमता रहेगा कि जिस चीज को वह बदलने चले थे, वह उसी का हिस्सा बन गए हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper