उत्तर प्रदेशराज्य

संभल में ईदगाह-इमामबाड़े के बाद अब मस्जिद और मदरसे पर चला बुलडोजर, सरकारी जमीन पर था कब्जा

संभल : संभल के असमोली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर बंद गांव में जिला प्रशासन ने अवैध रूप से बनी मस्जिद, गौसुल मदरसा और पांच दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में राजस्व टीम ने खाद के गड्ढे और खेल के मैदान के लिए आरक्षित 700 वर्गमीटर सरकारी भूमि को चिन्हित किया था। पैमाइश के बाद अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, जिसके बाद मदरसे को ध्वस्त कर दिया गया. अब मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिराने के लिए बुलडोजर पहुंचा है. ग्रामीणों और मस्जिद कमेटी ने खुद ही प्रशासन से अवैध निर्माण हटाने में मदद मांगी थी।

मस्जिद पर बुलडोजर चलने से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. सीओ कुलदीप सिंह के साथ दो थानों की पुलिस और आरपीएफ (RRF) के जवान मौके पर तैनात रहे. राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह निर्माण खेल के मैदान और खाद के गड्ढे की जमीन पर किया गया था. 31 मार्च से ही कमेटी के लोगों ने खुद दुकानों और मदरसे को हटाना शुरू कर दिया था, लेकिन मस्जिद का हिस्सा बाकी रहने पर अब प्रशासन ने इसे पूरी तरह ध्वस्त करने की कमान संभाली है।

संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने साफ किया है कि सरकारी भूमि पर हुए सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे. जिले में सवा सौ हेक्टेयर भूमि को अब तक कब्जा मुक्त कराया जा चुका है. प्रशासन अब इन जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए एक ‘लैंड बैंक’ बना रहा है, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके. डीएम ने चेतावनी दी है कि अवैध अतिक्रमण करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण मौके पर शांति बनी हुई है. यह कार्रवाई संभल जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा बताई जा रही है. पूरा मामला अब तहसील स्तर पर निगरानी में है. गौरतलब है कि संभल जिला प्रशासन लगातार अवैध कब्जे पर बुलडोजर की कार्रवाई कर रहा है. जिलाधिकारी ने खुद कहा है कि जिले में किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

मामले में लेखपाल स्पर्श गुप्ता ने 18 जनवरी, 2026 को तहसीलदार न्यायालय में धारा 67 के तहत वाद दायर किया। इसके बाद 31 जनवरी को सार्वजनिक नोटिस जारी कर अखबार में प्रकाशन कराया गया। ताकि संबंधित पक्ष सामने आकर अपना दावा पेश कर सके। हालांकि तय समय सीमा में कोई भी व्यक्ति स्वामित्व का दावा करने या अपत्ति दर्ज करने के लिए नहीं आया। अदालत ने इसके बाद अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए, लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो 31 जनवरी को ही बेदखली का आदेश पारित कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि इस आदेश के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई आपत्ति सामने नहीं आई। इससे प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। गुरुवार को एसडीएम निधि पटेल और नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया। इसलिए अब बुलडोजर कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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