बीबीएयू में मानसिक स्वास्थ्य पर मंथन, कुलपति बोले- आत्मचिंतन और भावनात्मक संतुलन से बनेगा स्वस्थ जीवन
लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में 13 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर पैनल चर्चा आयोजित की गई। मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘सुने गए जीवन के अनुभव: वास्तविक आवाज़, वास्तविक बदलाव’ रहा। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मद्देनजर आयोजित चर्चा में आत्मचिंतन, भावनात्मक संतुलन, युवाओं में बढ़ते तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक जागरूकता जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. विवेक अग्रवाल मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, स्कूल ऑफ योगा, नैचुरोपैथी एंड कॉग्निटिव स्टडीज के संकायाध्यक्ष प्रो. पी.एस. रजनीकांत, कार्यक्रम संयोजक डॉ. नवीन जी. एच., मधुरिमा प्रधान और डॉ. नगमा जावेद भी मौजूद रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। आयोजन समिति ने मुख्य अतिथि और शिक्षकों को पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। शुरुआत में प्रो. पी.एस. रजनीकांत ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी।
कुलपति ने आत्मचिंतन और आत्मबोध को बताया जरूरी
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए व्यक्ति का आत्मचिंतन करना और स्वयं को समझना बेहद जरूरी है। अपनी भावनाओं, विचारों, क्षमताओं और सीमाओं को पहचानने से समस्याओं को बेहतर तरीके से समझने और उनके समाधान तलाशने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक अपेक्षाओं, प्रतिस्पर्धा और दूसरों से अपनी तुलना करने की प्रवृत्ति के चलते खासकर युवा तनाव और चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भावनाओं को समझना, स्वयं को शांत रखना और जीवन में संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य जितनी प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति अपने व्यक्तिगत, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में बेहतर संतुलन बना सकता है।
प्रो. मित्तल ने भारतीय ज्ञान परंपरा की पंचकोश अवधारणा का उल्लेख करते हुए बताया कि अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश शरीर, प्राण, मन, बुद्धि तथा आंतरिक आनंद के विभिन्न आयामों को समझने में सहायक हैं। उन्होंने परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और समाज से ऐसा सहयोगात्मक माहौल तैयार करने की अपील की, जहां युवा बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें और स्वस्थ एवं सार्थक जीवन की दिशा में आगे बढ़ सकें।
डॉ. विवेक अग्रवाल बोले- मानसिक स्वास्थ्य जीवन के हर पहलू से जुड़ा
मुख्य वक्ता डॉ. विवेक अग्रवाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ केवल मानसिक बीमारियों का न होना नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव जीवन के लगभग हर पहलू पर पड़ता है। व्यक्ति के विचार, भावनाएं, व्यवहार, रिश्ते और निर्णय लेने की क्षमता मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं।
उन्होंने बताया कि पढ़ाई, करियर, सामाजिक अपेक्षाओं और व्यक्तिगत चुनौतियों के कारण आज के युवा कई तरह के मानसिक और भावनात्मक दबावों से गुजर रहे हैं। उन्होंने मरीजों के उपचार में उनकी शारीरिक समस्याओं के साथ भावनात्मक स्थिति और मानसिक जरूरतों को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के दौरान भावनात्मक सहारा और संवेदनशील संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बचपन के प्रतिकूल अनुभवों यानी एडवर्स चाइल्डहुड एक्सपीरियंस का जिक्र करते हुए बताया कि बचपन में मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने का असर व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक विकास पर लंबे समय तक रह सकता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, जरूरतमंदों को समय पर सहयोग देने और मानसिक समस्याओं को लेकर मौजूद झिझक व भेदभाव दूर करने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
सहानुभूति और संवेदनशील संवाद पर दिया जोर
डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहानुभूति और संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दूसरों की परिस्थितियों, भावनाओं और मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे लोगों की बात धैर्य से सुनना और उन्हें भावनात्मक सहयोग देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसा सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण विकसित किया जाना चाहिए, जहां लोग बिना किसी संकोच या भेदभाव के अपनी समस्याएं साझा कर सकें और उन्हें जरूरी सहयोग व समझ मिल सके।
पोस्टर और नुक्कड़ नाटक से दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पोस्टर मेकिंग और नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, इससे जुड़ी चुनौतियों और समय पर सहयोग की जरूरत को रचनात्मक तरीके से सामने रखा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
पोस्टर प्रतियोगिता में जूलॉजी विभाग की रोशिता ने प्रथम स्थान हासिल किया। लाइफ साइंस विभाग के ओम सिंह को दूसरा और अखिल राज को तीसरा पुरस्कार मिला, जबकि आयुषी मिश्रा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं, नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता में निकिता आर्या, हर्षिता सिंह, पायल मीणा, आजाद सिंह और अभिनव नायर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
प्रश्नोत्तर सत्र में तनाव और चिंता पर हुई चर्चा
मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देने के लिए प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने तनाव प्रबंधन, चिंता और भावनात्मक संतुलन से जुड़े सवाल पूछे और इन विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. नवीन जी. एच. ने सभी अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन के दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

