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ओरांवा गांव के विकास के लिए आगे आया बीबीएयू, स्वास्थ्य शिविर से लेकर पौधरोपण तक कई पहल

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) ने ग्रामीण विकास, जनस्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरोजिनी नगर विधानसभा क्षेत्र के गोद लिए गए ओरांवा गांव में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। 15 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के अवसर पर उन्नत भारत अभियान के तहत हुए इस आयोजन में स्वास्थ्य शिविर, जैविक खेती के लिए जैव उर्वरकों का वितरण, पौधरोपण, प्लास्टिक मुक्त गांव अभियान, जागरूकता प्रदर्शनी और खेल गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों और विद्यार्थियों को स्वास्थ्य, स्वच्छता, मानसिक कल्याण तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस दौरान उन्नत भारत अभियान, बीबीएयू के समन्वयक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, प्रो. यू.वी. किरण, मानव विकास एवं परिवार अध्ययन विभाग की अध्यक्ष प्रो. शालिनी अग्रवाल और डॉ. रुपिका चोपड़ा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। विश्वविद्यालय ने माध्यमिक विद्यालय में आयोजित गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और गांव के समग्र विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कुलपति बोले- ग्रामीण विद्यार्थियों को शिक्षा और करियर मार्गदर्शन देना प्राथमिकता

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विद्यालय के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और आने वाले समय में राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है कि वह गोद लिए गए गांवों के समग्र विकास के लिए लगातार प्रयास करे और ग्रामीण विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए।

उन्होंने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय की ओर से गांव में पुस्तकालय विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से बीबीएयू के शिक्षक और शोधार्थी विद्यार्थियों से संवाद करेंगे तथा उन्हें करियर संबंधी मार्गदर्शन देंगे। कुलपति ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय का भ्रमण करने के लिए भी प्रेरित किया, ताकि वे उच्च शिक्षा के विभिन्न अवसरों को समझ सकें और अपने भविष्य के लिए सही दिशा तय कर सकें।

उन्नत भारत अभियान के तहत गांव के विकास पर जोर

प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करते हुए गांव के विकास के लिए विश्वविद्यालय की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीबीएयू पहले भी ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी और पानी की जांच, स्वास्थ्य शिविरों तथा अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियों का आयोजन करता रहा है।

उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को समझना, जरूरी सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और वैज्ञानिक व व्यावहारिक उपायों के जरिए जीवन स्तर में सुधार लाना है। विश्वविद्यालय शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के माध्यम से ग्रामीण समुदाय को सशक्त बनाने तथा सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है।

विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य की दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान प्रो. यू.वी. किरण और प्रो. शालिनी अग्रवाल ने ग्रामीण विद्यार्थियों तथा उपस्थित लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और अपनी भावनाओं को समझने व व्यक्त करने के महत्व पर चर्चा की। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने और जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन व सहायता लेने की अपील की।

मानव विकास एवं परिवार अध्ययन विभाग के विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से बच्चों और बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई। प्रस्तुति में यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

किसानों को बांटे जैव उर्वरक, जैविक खेती अपनाने की अपील

ग्रामीण क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से किसानों को निःशुल्क जैव उर्वरक वितरित किए गए। किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम से कम इस्तेमाल करने तथा जैविक विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल का उद्देश्य खेती में पर्यावरण के अनुकूल तरीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

वहीं, विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र की ओर से लगाए गए शिविर में ग्रामीणों का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और जरूरत के अनुसार बुनियादी दवाइयां निःशुल्क दी गईं। बच्चों और अन्य जरूरतमंद लोगों को पेट के कीड़ों से बचाव तथा दूसरी बीमारियों के उपचार से संबंधित दवाइयां भी वितरित की गईं।

प्लास्टिक मुक्त गांव का संदेश, फलदार पौधे भी लगाए

पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से विद्यालय परिसर और गांव के अन्य उपयुक्त स्थानों पर फलदार पौधे लगाए गए। प्लास्टिक मुक्त गांव अभियान के तहत ग्रामीणों को एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया। इसके विकल्प के रूप में लोगों को कपड़े के थैले निःशुल्क वितरित किए गए।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी जानकारी दी गई और लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए पर्चे बांटे गए। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित खेलों और गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण के महत्व से परिचित कराया गया।

ग्रामीण समुदाय के साथ विश्वविद्यालय की भागीदारी मजबूत करने की पहल

ओरांवा गांव में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से बीबीएयू ने ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता को सामने रखा। इन गतिविधियों का उद्देश्य विश्वविद्यालय और ग्रामीण समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ स्वस्थ, जागरूक, पर्यावरण अनुकूल और आत्मनिर्भर गांव के निर्माण को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 

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