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बीबीएयू में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जागरूकता अभियान, 100 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ होम साइंस के खाद्य एवं पोषण विभाग की ओर से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” विषय पर विभिन्न पोषण जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों और समुदाय को संतुलित आहार, स्वस्थ खान-पान की आदतों, पोषण शिक्षा और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. मित्तल के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन में आयोजित हुआ।

गर्भवती महिलाओं के पोषण पर दिया विशेष जोर

कार्यवाहक कुलपति एवं वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. सुनीता मिश्रा ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के लिए संतुलित और पर्याप्त पोषण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। साथ ही दैनिक आहार में मिलेट्स यानी श्रीअन्न को शामिल करने के फायदे बताए और सतत, किफायती तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाने की अपील की।

पूरी गतिविधि श्रृंखला का आयोजन स्कूल ऑफ होम साइंस की डीन एवं विभागाध्यक्ष प्रो. नीतू सिंह के निर्देशन और पर्यवेक्षण में किया गया। आयोजन टीम में डॉ. प्रियंका शंकर, डॉ. माधवी डेनियल और डॉ. आशीष जाटव के साथ शोधार्थियों एवं कार्यालय कर्मचारियों ने सक्रिय सहयोग किया।

पोस्टर और स्लोगन के जरिए पोषण का संदेश

पोषण माह के तहत पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता के साथ पोषण जागरूकता के लिए फ्लेक्स निर्माण गतिविधि भी आयोजित की गई। इसमें 100 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने पोस्टर, स्लोगन और फ्लेक्स के माध्यम से संतुलित एवं पौष्टिक आहार, स्वस्थ भोजन की आदतों, विविधतापूर्ण आहार और दैनिक जीवन में पोषण के महत्व से जुड़े संदेश प्रस्तुत किए।

जागरूकता सामग्री के माध्यम से “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” विषय पर विशेष जोर दिया गया। इसमें आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका, बच्चों एवं समुदाय के पोषण और सामुदायिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया गया।

बिजनौर के माध्यमिक विद्यालय में भी पहुंचा जागरूकता अभियान

इसी क्रम में खाद्य एवं पोषण विभाग की ओर से बिजनौर, सरोजिनी नगर, लखनऊ स्थित माध्यमिक विद्यालय में सामुदायिक भ्रमण एवं पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभाग के परास्नातक और पीएच.डी. विद्यार्थियों ने विद्यालय पहुंचकर पोस्टर और फ्लेक्स के माध्यम से विद्यार्थियों एवं समुदाय को पोषण से जुड़ी जानकारी दी।

कार्यक्रम में करीब 80 माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। उन्हें संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, स्वस्थ खान-पान की आदतों और दैनिक जीवन में उचित पोषण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

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थाली में अलग-अलग रंगों के खाद्य पदार्थ शामिल करने की अपील

इस अवसर पर प्रो. सुनीता मिश्रा और प्रो. नीतू सिंह ने विद्यार्थियों एवं उपस्थित समुदाय को स्वस्थ और संतुलित भोजन के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने भोजन की थाली में विभिन्न रंगों के खाद्य पदार्थों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां विभिन्न आवश्यक पोषक तत्वों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इसके अलावा मिलेट्स यानी श्रीअन्न, सहजन यानी मोरिंगा और अन्य स्थानीय एवं पोषक खाद्य पदार्थों के स्वास्थ्य संबंधी महत्व की जानकारी देते हुए इन्हें दैनिक आहार में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बांटी गई पोषण किट

सामुदायिक कार्यक्रम के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण संबंधी किट भी वितरित की गईं। इसका उद्देश्य समुदाय और बच्चों के बीच पोषण से जुड़े संदेशों को प्रभावी तरीके से पहुंचाने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सहयोग देना रहा।

विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए जलपान की भी व्यवस्था की गई। इस दौरान विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी पोषण संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और उन्हें स्वस्थ भोजन तथा बेहतर खान-पान की आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

शोधार्थियों ने भी निभाई अहम भूमिका

कार्यक्रम के सफल संचालन में खाद्य एवं पोषण विभाग के शोधार्थियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलका नंदा, आयुषी सिंह, प्रशांत सागर, शैलेश कुमार, तान्या सिंह, नेहा मौर्य, दिव्या दुबे और प्रियांशा प्रकाश ने पोस्टर एवं फ्लेक्स निर्माण, जागरूकता सामग्री तैयार करने, विद्यार्थियों के साथ संवाद, सामुदायिक भ्रमण और कार्यक्रम के विभिन्न चरणों के संचालन में सक्रिय सहभागिता की।

खाद्य एवं पोषण विभाग की यह पहल “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” की भावना के अनुरूप सामुदायिक सहभागिता और पोषण जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास रही। कार्यक्रम के माध्यम से स्वस्थ और पोषण-संपन्न समाज के निर्माण के लिए शिक्षण संस्थानों, विद्यार्थियों, परिवारों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और समुदाय की सामूहिक भागीदारी के महत्व का संदेश दिया गया।

 

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