BBAU और चंबल आर्काइव्स न्यास के बीच हुआ बड़ा समझौता, भारतीय ज्ञान परंपरा और विरासत संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ और चंबल आर्काइव्स न्यास के बीच 2 नवंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अभिलेखीकरण, क्षमता निर्माण और अकादमिक-औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, चंबल आर्काइव्स न्यास की ओर से मानवेन्द्र पोरवाल और कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
संयुक्त शोध और शैक्षणिक कार्यक्रमों पर होगा काम
इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान प्रणाली उत्कृष्टता केंद्र को अकादमिक और औद्योगिक सहयोग के जरिए और अधिक मजबूत बनाना है। इसके तहत दोनों संस्थान मिलकर शैक्षणिक कार्यक्रम, शोध गतिविधियां, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
समझौते के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण और शोध कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। दोनों संस्थान भारतीय ज्ञान प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर संयुक्त शोध परियोजनाएं तैयार करने और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से शोध अनुदान हासिल करने के लिए भी सहयोग करेंगे।
इसके अलावा तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों का आदान-प्रदान किया जाएगा। अकादमिक जगत और उद्योग के बीच ज्ञान हस्तांतरण को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों के कौशल विकास, रोजगारपरक क्षमता और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिलेंगे नए अवसर
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा देश की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का अहम आधार है। चंबल आर्काइव्स न्यास के साथ हुआ यह समझौता विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली उत्कृष्टता केंद्र को नई दिशा देने के साथ उसके कार्यक्षेत्र का विस्तार करेगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विरासत संरक्षण, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, अभिलेखीकरण और पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही उन्हें शोध के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
कुलपति के मुताबिक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, संयुक्त प्रशिक्षण और शोध गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के कौशल विकास को भी गति मिलेगी। यह पहल विश्वविद्यालय और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक स्तर पर उसके प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा, रिसर्च एंड डेवलपमेंट निदेशक प्रो. शिशिर कुमार, प्रो. शूरा दारापुरी, प्रो. सुभाष मिश्रा और डॉ. सुदर्शन चक्रधारी भी उपस्थित रहे।
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