Nishita Kaal Samay Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर निशिता काल कब से कब तक रहेगा? जानें इस दौरान शिव पूजा कैसे करनी है
Nishita Kaal Mahashivratri 2026 (महाशिवरात्रि निशिता काल पूजा मुहूर्त 2026): महाशिवरात्रि शिव भक्तों के लिए पूजा-उपासना का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। कहते हैं इस दिन भगवान शिव संसार के हर शिवलिंग में विराजित होते हैं। यही कारण है कि इस दिन शिवलिंग पूजा का बेहद खास महत्व माना जाता है। वैसे तो महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा कभी भी की जा सकती है लेकिन अगर इस पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त की बात करें तो वो निशिता काल का समय होता है। चलिए जानते हैं महाशिवरात्रि पर निशिता काल समय क्या रहेगा और इसे क्यों इतना महत्वपूर्ण माना गया है।
महा शिवरात्रि 2026 निशिता काल मुहूर्त (Maha Shivratri 2026 Nishita Kaal Time)
महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा समय 15 फरवरी 2026 की रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। ये शिवरात्रि पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त है। इस दौरान पूरी श्रद्धा से शिव की उपासना करें और उनके मंत्रों का जाप करें। इससे आपको भोलेनाथ की शीघ्र ही कृपा प्राप्त हो जाएगी।
महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजन विधि (Maha Shivratri par Nishita Kaal Pujan Vidhi)
- निशिता काल से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
- फिर शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करें।
- अभिषेक करते समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें।
- शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन और फूल चढ़ाएं।
- धूप-दीप दिखाएं और नैवेद्य चढ़ाएं।
- कपूर से भगवान शिव की आरती करें।
- आप चाहें तो इस समय पर पंडित जी से रुद्राभिषेक भी करा सकते हैं।
महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजन का महत्व (Maha Shivratri Par Nishita Kaal Puja Ka Mahatva)
निशिता काल समय रात्रि के मध्य हिस्से को दर्शाता है और ये समय शिव की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। कहते हैं इस अवधि में किये गए जप, ध्यान और रुद्राभिषेक का विशेष फल प्राप्त होता है।

महाशिवरात्रि के दिन निशिता काल में क्यों नहीं सोना चाहिए (Maha Shivratri Par Nishita Kaal Mein Kyu Nhi Sona Chahiye)
शास्त्रों में बताया गया है कि निशिता काल में की गई पूजा, मंत्र जाप और ध्यान कई गुना फल देता है, इसलिए भक्तों को इस अवधि में जागकर भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। माना जाता है कि इस काल में शिव तत्व की ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है जिससे मन को शांति और आत्मिक बल मिलता है।



