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लोकतंत्र और समाजवाद के लिए आजीवन संघर्षरत थे राज नारायण, गरीबों की बुलंद आवाज थे समाजवादी नेता

लखनऊ। समतावादी चेतना अभियान के राष्ट्रीय संयोजक एवं राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय सचिव विजय श्रीवास्तव ने महान समाजवादी नेता लोकबंधु राज नारायण की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राज नारायण जी लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। वे देश के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने सत्ता नहीं बल्कि सिद्धांतों को हमेशा प्राथमिकता दी।

विजय श्रीवास्तव ने कहा कि राज नारायण जी गरीबों, मजदूरों, शोषितों, वंचितों, पिछड़ों, दलितों और महिलाओं की सशक्त आवाज थे। वे सामाजिक विषमता के घोर विरोधी रहे और बराबरी पर आधारित समाज के निर्माण के लिए लगातार संघर्ष करते रहे।

आर्थिक न्याय को सामाजिक न्याय की बुनियाद मानते थे
उन्होंने कहा कि राज नारायण जी का स्पष्ट मानना था कि जब तक देश में आर्थिक न्याय स्थापित नहीं होगा, तब तक सामाजिक न्याय की लड़ाई पूरी नहीं हो सकती। इसी सोच के साथ उन्होंने समाजवाद की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया।

लोहिया और जेपी के संघर्षों के रहे साथी
विजय श्रीवास्तव ने बताया कि राज नारायण जी समाजवादी विचारधारा के प्रखर नेता डॉ. राममनोहर लोहिया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संघर्षों के अहम साथी रहे। वे हिंदी आंदोलन के भी बड़े नेता थे और देश में हिंदी को सम्मान दिलाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जातिवाद और सांप्रदायिकता के कट्टर विरोधी
उन्होंने कहा कि राज नारायण जी जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति के घोर विरोधी थे। वे एक ईमानदार, संघर्षशील, बेबाक और सच्चे समाजवादी एवं गांधीवादी नेता थे, जिनका पूरा जीवन जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में समर्पित रहा।

 

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