Raj Yog: 4 राशियों में 30 साल बाद बने राज योग, इस राशी के जातकों की चमकेगी किस्मत

30 साल बाद शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि में विराजमान हो गए हैं ग्रहों की ऐसी स्थिति चार राशि वालों की कुंडली में शश और मालव्य नाम के दो महापुरुष राजयोग बना रही है जिसके चलते 4 राशियों के लिए यह बहुत खास है। शुक्र और बुध ग्रह फिलहाल वृषभ राशि में विराजमान है। शुक्र और बुध में मित्रता का भाव रहता है, ग्रहों की यह दशा कई राशियों के लिए बहुत ही खास मानी जा रही है। 4 राशियों के लिए यह बहुत ही खास है जो हम आपको बताते हैं।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों की अगर बात करे तो वृषभ राशि वालों के लग्न भाव में बना राजयोग करियर की दिशा बदल सकता है। नौकरी में उन्नति अर्थात प्रमोशन के योग बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। लंबे समय से नौकरी की तलाश में जो व्यक्ति भटक रहे हैं उन्हें खुशखबरी मिल सकती है। मान सम्मान में भी वृद्धि होगी और व्यापारिक दृष्टि से भी यह बहुत ही अच्छा साबित होने वाला है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए बुध और शुक्र की युति से शश और मालव्य नाम के ये दो राज योग बने हैं। इससे अचानक धन लाभ हो सकता है। जिनका विदेश जाने का सपना है वह भी पूरा हो होगा है। पार्टनरशिप में बिजनेस शुरू करने के लिए यह बहुत अच्छा समय है और प्रॉपर्टी में निवेश करने से भी लाभ होगा, जमीन जायदाद से जुड़े मामले पक्ष में आएंगे।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों को नौकरी में तरक्की मिलने के योग बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। नई नौकरी का ऑफर भी मिल सकता है, आर्थिक स्थिति जो लंबे समय से डगमगा रही थी, उससे भी राहत मिलने वाली है। नया काम शुरू करने और नए वाहन खरीदने के लिए यह समय बहुत ही अच्छा है।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए शश और मालव्य राजयोग का निर्माण हो रहा है। जोकि सुख संसाधनों में वृद्धि होगी। घर मकान से जुड़े कार्य भी जल्दी संपन्न होंगे। मांगलिक कार्यों को पूरा करने के लिए यह समय बहुत ही अच्छा है। आय के नए स्त्रोत भी उत्पन्न होंगे। राजयोग बने रहने तक आपको भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ------------------------- ------------------------------------------------------ -------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------- --------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------   ----------------------------------------------------------- -------------------------------------------------- -----------------------------------------------------------------------------------------
----------- -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper