शामली में बिजली को लेकर बवाल: पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष की धमकी—‘बिजलीघर जला दूंगा’, JE का पलटवार—‘लगा दो, आपका ही है’

शामली। उत्तर प्रदेश के शामली में बिजली आपूर्ति को लेकर एक भाजपा नेता और बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर के बीच फोन पर हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान खुलेआम धमकी देते नजर आ रहे हैं, जबकि जेई का जवाब भी उतना ही तल्ख सुनाई देता है। मामले ने प्रशासनिक कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों के दबाव को लेकर बहस छेड़ दी है।
फोन पर धमकी और जवाब, वीडियो वायरल
वायरल वीडियो में मनीष चौहान जेई से कहते हैं, “मतलब मेरे से बहस करोगे, क्या मुझे चैलेंज करोगे आप। लाइनमैन नहीं आएंगे तो इस बिजलीघर को आग लगा दूंगा मैं।” इस पर जूनियर इंजीनियर का जवाब आता है, “लगा दो, आपका ही है।” वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
बीजेपी नेता हैं मनीष चौहान
मनीष चौहान, भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे बताए जाते हैं। बताया जा रहा है कि यह विवाद करीब छह महीने पुराना है, जो अब वीडियो वायरल होने के बाद सुर्खियों में आया है।
बिजली चोरी और बकाया वसूली बना विवाद की जड़
जानकारी के मुताबिक, करीब छह महीने पहले जूनियर इंजीनियर सत्यप्रकाश अपनी टीम के साथ गांव डूंडूखेड़ा पहुंचे थे। वहां बिजली चोरी रोकने और बकाया वसूली के अभियान के तहत कई कनेक्शन काटे गए थे। इसी कार्रवाई से नाराज ग्रामीणों की शिकायत पर मनीष चौहान ने जेई से फोन पर बात की, जो बाद में बहस में बदल गई।

‘नौटंकी’ शब्द पर और भड़की बहस
फोन कॉल के दौरान मनीष चौहान ने कहा, “ये क्या नौटंकी चला रखी है भाई, मतलब मेरे से पेंच लड़ाओगे।” इस पर जेई ने जवाब दिया, “हमने कहां नौटंकी चला रखी है सर, हम क्या कह रहे हैं सर।” दोनों के बीच बातचीत का यह अंश वीडियो में साफ सुना जा सकता है।
मारपीट की तहरीर, FIR अब तक नहीं
सूत्रों के अनुसार, उसी दौरान जेई ने गांव में टीम के साथ मारपीट को लेकर पुलिस को तहरीर भी दी थी, लेकिन छह महीने बीतने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। इस पूरे मामले पर फिलहाल मनीष चौहान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक सख्ती बनाम राजनीतिक दबाव पर सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद बिजली विभाग की कार्रवाई, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह इस प्रकरण में क्या कदम उठाता है।


