SC का जज बनकर धमकाने वाले सुकेश चंद्रशेखर को 8 साल की सजा, अब हाईकोर्ट में चुनौती; आज सुनवाई संभव
नई दिल्ली: कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने की कोशिश के मामले में सुनाई गई 8 साल की सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। तीस हजारी अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका पर हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई कर सकता है।
मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा की अदालत ने सुकेश के कृत्य को संस्थागत अपमान करार दिया था। अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में खुद की पहचान बताकर धोखा देना न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर हमला है। सजा तय करते समय अदालत ने सुकेश की ओर से पछतावा नहीं दिखाने और शिकायतकर्ता पर ही सवाल उठाने के रवैये को भी ध्यान में रखा।

जेल में रहते हुए किया था फोन का इस्तेमाल
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर ने न्यायिक हिरासत में रहते हुए पुलिस कॉन्स्टेबल मंजीत के मोबाइल फोन तक पहुंच हासिल की थी। इसी फोन के जरिए उसने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहीं विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी के सरकारी लैंडलाइन नंबर पर संपर्क किया था।
आरोप है कि इस दौरान उसने खुद को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर पेश किया और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।
सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा सुकेश
सुकेश ने अपनी याचिका में निचली अदालत के फैसले में उसके चरित्र को लेकर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। उसने इन टिप्पणियों को अपमानजनक, निंदात्मक, कलंकपूर्ण और मामले के फैसले के लिए अनावश्यक बताया है।
याचिका में दावा किया गया है कि निचली अदालत ने उसके खिलाफ पहले से बनी नकारात्मक धारणा के साथ मामले पर विचार किया और बचाव पक्ष को अपने सभी साक्ष्य पेश करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। सुकेश का कहना है कि फैसला सबूतों के आधार पर होना चाहिए था।
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2017 के फोन कॉल से जुड़ा है मामला
यह मामला 28 अप्रैल 2017 को किए गए एक फोन कॉल से जुड़ा है। उस समय सुकेश भ्रष्टाचार से संबंधित एक मामले में पुलिस हिरासत में था। अभियोजन के मुताबिक, उसने पुलिस कॉन्स्टेबल मंजीत का मोबाइल फोन हासिल कर लिया और उससे पूनम चौधरी के सरकारी लैंडलाइन और मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।
पूनम चौधरी उस समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष न्यायाधीश थीं। आरोप है कि फोन के जरिए न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
इन धाराओं में दोषी ठहराया गया
निचली अदालत ने 20 अगस्त को सुकेश चंद्रशेखर को भारतीय दंड संहिता की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी ठहराया था। धारा 170 सरकारी कर्मचारी के रूप में खुद को पेश करने, धारा 189 सरकारी कर्मचारी को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने और धारा 507 गुमनाम संदेश के जरिए आपराधिक धमकी से संबंधित है।
अदालत ने उसके कृत्य को न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और पवित्रता का सीधा अपमान बताया था। अदालत के मुताबिक, सुकेश ने पहले सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश के निजी सचिव के रूप में और बाद में फर्जी तरीके से खुद को न्यायाधीश बताकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

