बीबीएयू में योग पर विशेष व्याख्यान, पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र बोले- योग से बदल सकता है जीवन
लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में 13 अक्टूबर को योग के महत्व और समग्र कल्याण में उसकी भूमिका पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। एमिनेंट लेक्चर सीरीज समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘योग: भारतीय ज्ञान परंपरा से आधुनिक वैज्ञानिक समझ और समग्र कल्याण तक’ रहा। व्याख्यान में योग के जरिए शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और आत्मिक विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि और वक्ता के रूप में स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र उपस्थित रहे। मंच पर प्रो. सुनीता मिश्रा और एमिनेंट लेक्चर सीरीज समिति की अध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किए जाने के बाद अतिथि को पौधा भेंट किया गया। प्रो. शिल्पी वर्मा ने स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी, जबकि मंच संचालन डॉ. सुदर्शन चक्रधारी ने किया।
योग भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का अभिन्न हिस्सा: कुलपति
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न अंग है। यह व्यक्ति को आत्मचिंतन, आत्मबोध और समाज कल्याण के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि जहां आधुनिक जीवन की कुछ प्रवृत्तियां भौतिक उपलब्धियों और उपभोक्तावाद पर केंद्रित हैं, वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा आंतरिक शांति, नैतिक मूल्यों और सामूहिक कल्याण का संदेश देती है। प्रो. मित्तल ने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत और योग की प्राचीन परंपरा से जुड़ने तथा उसके आदर्शों को जीवन में अपनाने की अपील की।
कुलपति ने कहा कि तेजी से बदलते समय में युवाओं को नैतिक और मानवीय मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। योग अनुशासन, संयम, सहिष्णुता और समरसता का मार्ग दिखाता है। इसके सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाकर युवा अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं को भी मजबूत कर सकते हैं।
पद्मश्री डॉ. नागेंद्र ने समझाए योग के बाहरी और आंतरिक लाभ
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र ने कहा कि योग एक क्रांति की तरह है, जिसमें मानव जीवन में सकारात्मक और व्यापक बदलाव लाने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक समाज में तेजी से हो रहे परिवर्तनों के बीच योग की प्रासंगिकता बढ़ी है। इसके अभ्यास से शारीरिक स्वास्थ्य, क्षमता और कार्यशैली में बदलाव के साथ मानसिक स्थिति, भावनात्मक संतुलन और आंतरिक चेतना के विकास में भी सहायता मिल सकती है।
उन्होंने पंचकोश की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश मानव व्यक्तित्व के अलग-अलग आयामों को दर्शाते हैं। इन सभी के समुचित विकास की अवधारणा व्यक्ति को समग्र रूप से समझने का दृष्टिकोण देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और चेतना के बीच संतुलन स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है।
अष्टांग योग से मानसिक स्थिरता और आत्मिक विकास पर जोर
डॉ. नागेंद्र ने अष्टांग योग के आठ अंगों- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनके नियमित अभ्यास से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्थिरता और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने योग के वैज्ञानिक महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि यह तनाव प्रबंधन, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। युवाओं के संदर्भ में उन्होंने योग को मन को शांत करने और उसकी चंचलता को नियंत्रित करने का प्रभावी माध्यम बताया।
स्वामी विवेकानंद के कथन “प्रत्येक आत्मा संभावित रूप से दिव्य है” का उल्लेख करते हुए डॉ. नागेंद्र ने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर असीम संभावनाएं होती हैं। आत्मानुशासन, साधना और योग के माध्यम से इन क्षमताओं को विकसित करने का प्रयास किया जा सकता है।
अतिथियों का सम्मान, प्रो. सुनीता मिश्रा ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की ओर से मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रो. सुनीता मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

