“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अवसर पर शिक्षा विभाग में विचार गोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम का सफल आयोजन

बरेली,23 अप्रैल। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में माननीय कुलपति प्रोफेसर के. पी. सिंह जी के सान्निध्य, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के उपलक्ष्य में एक विचार गोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सांस्कृतिक गौरव, आध्यात्मिक चेतना एवं शैक्षिक जागरूकता के संगम के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का संचालन एम.एड. की छात्रा जयति शुक्ला ने किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में नोडल अधिकारी डॉ. प्रेम पाल सिंह ने सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पर्व समाज को उसकी समृद्ध विरासत से पुनः जोड़ने का कार्य करता है। वर्तमान समय में सोमनाथ मंदिर एक जीवंत तीर्थस्थल के रूप में स्थापित है। उन्होंने भगवान शिव से जुड़े विभिन्न प्रतीकों – अर्धचंद्र, जटा, गंगा, त्रिनेत्र, नाग, रुद्राक्ष, भस्म, त्रिशूल, डमरू, व्याघ्र चर्म तथा नंदी – का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र की एकता एवं सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने का संकल्प दिलाया।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर आशुतोष प्रिय ने अपने संबोधन में कहा कि छात्रों को अपनी संस्कृति की पहचान करनी चाहिए और अपनी समृद्ध धरोहर को स्वाभिमान के रूप में आत्मसात करना चाहिए।

विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। एम.एड. की छात्रा प्रिया शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर हमारी आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है।
कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि जिस प्रकार सोमनाथ मंदिर को बार-बार ध्वस्त किए जाने के बावजूद हर बार उसका पुनर्निर्माण हुआ, उसी प्रकार हमें भी निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सतत प्रयास से ही सफलता प्राप्त होती है।
इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डॉ. सुधीर कुमार वर्मा, डॉ. मीनाक्षी द्विवेदी, डॉ. रामबाबू सिंह, रश्मि रंजन, विमल कुमार एवं डॉ. कीर्ति प्रजापति सहित अनेक शोधार्थी – कपिल तिवारी, आकाश, शिवि, सत्यप्रकाश, शालिनी, साबिया, धनंजय, बबिलेश – उपस्थित रहे।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
