अयोध्या जिला जेल से रेप-हत्या के आरोपी दो बंदी फरार, सुरक्षा में बड़ी चूक; जेल अधीक्षक समेत 7 अधिकारी सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जिला कारागार की सुरक्षा व्यवस्था उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब रेप और हत्या जैसे गंभीर मामलों में बंद दो कैदी जेल से फरार हो गए। दोनों बंदियों ने बैरक में लगी ग्रिल काटी और फिर बांस के सहारे उस हिस्से से चारदीवारी पार कर ली, जहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी नहीं थी। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और पुलिस ने तत्काल तीन टीमें गठित कर तलाश अभियान शुरू कर दिया।

कैसे फरार हुए दोनों बंदी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों कैदी बैरक से बाहर निकलने के बाद जेल के पिछले हिस्से की ओर पहुंचे, जहां हरियाली अधिक होने के कारण निगरानी कमजोर थी। यहीं से उन्होंने बांस और अन्य सामान का इस्तेमाल कर चारदीवारी फांदी और फरार हो गए। फरार बंदियों में अमेठी जिले के मुसाफिरखाना निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरि पुत्र साधुराम और सुल्तानपुर निवासी शेर अली शामिल हैं।
पुलिस ने बनाई तीन टीमें, तलाश तेज
एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। जांच में पता चला कि दोनों बंदी जेल के पिछले हिस्से से बांस के ऊंचे पेड़ों का सहारा लेकर दीवार पार कर गए। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के लिए तीन पुलिस टीमें लगाई गई हैं और जल्द ही दोनों को पकड़ लिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार एक बंदी हत्या के प्रयास के मामले में जबकि दूसरा बलात्कार के आरोप में जेल में निरुद्ध था।
जेल अधीक्षक समेत 7 पर गिरी गाज
दो बंदियों के फरार होने के मामले में जेल प्रशासन पर बड़ी कार्रवाई की गई है। डीजी जेल पीसी मीणा ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक यूसी मिश्रा को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा जेलर जेके यादव और डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी को भी सस्पेंड किया गया है। ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने पर एक हेड जेल वार्डर और तीन जेल वार्डरों को भी निलंबित कर दिया गया है।

जांच के लिए अयोध्या पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी जेल ए.के. मैत्रेय अयोध्या पहुंच गए हैं। वहीं जिलाधिकारी निखिल टीकाराम और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर भी जिला जेल पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
बैरक से लेकर बाउंड्री तक खुली लापरवाही
डीआईजी जेल ए.के. मैत्रेय ने बताया कि दोनों बंदी विशेष बैरक नंबर चार में बंद थे। उन्होंने रोशनदान की ईंटें तोड़कर बाहर निकलने का रास्ता बनाया। मौके से करीब 25 फीट लंबा बांस, 30 फीट की सरिया और एक कंबल बरामद किया गया है। कंबल को रस्सी का रूप देकर दोनों ने बाउंड्री वॉल कूदकर जेल से बाहर निकलने में काम लिया।

