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रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में युवा विकास संगोष्ठी का आयोजन

बरेली,19अप्रैल। महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली में कल युवाओं हेतु अभिप्रेरक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसका विषय लाइफ ऑन टू व्हील्स: बैलेंसिंग मॉडर्न लाइफ एंड इनर पीस रहा। सेमिनार का आयोजन एथीक्राफ्ट संस्था, नई दिल्ली तथा महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था जिसका आयोजन डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. पी.बी.सिंह तथा सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष माननीय कुलपति प्रो. के.पी. सिंह जी रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। कल्चरल क्लब की पूनम, अदिति, श्वेता, निकिता ने सरस्वती वंदना का गायन किया। अतिथियों के औपचारिक स्वागत के पश्चात दिन प्रो. पी.बी .सिंह द्वारा स्वागत भाषण दिया गया और कहा गया कि वर्तमान समय में युवाओं के सर्वांगीण विकास हेतु उनका व्यक्तित्व विकास, कैरियर मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन तथा उन्हें नैतिकता, जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना विकसित करना बहुत जरूरी है युवा विकास संगोष्ठी के माध्यम से युवाओं के समग्र विकास के लिए मंच की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पी एम ऊषा समन्वयक प्रो. संजय मिश्रा ने कहा कि आधुनिक जीवन में भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और तनाव के कारण विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में आंतरिक शांति, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम आत्मज्ञान की प्राप्ति का प्रयास करें। ध्यान, योग, सकारात्मक सोच, प्रकृति के साथ समय बिताना ,परिवार के साथ समय बिताना, आध्यात्मिक अध्ययन करना ,सेवा और करुणा भावना व्यक्ति को न केवल जीवन के वास्तविक उद्देश्य की ओर ले जाती है बल्कि उसका आध्यात्मिक विकास भी करती है और युवा विकास संगोष्ठी के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन में संतुलन स्थापना सीखने का प्रयास करना चाहिए। टेंपल मैनेजर श्री भानु अर्जुनदास द्वारा क्लब के द्वारा युवाओं के लिए किए जाने वाले कार्यों के विषय में बताता गया। परीक्षा नियंत्रक श्री संजीव कुमार सिंह द्वारा विद्यार्थियों को अभिप्रेरित किया गया। डॉ.ज्योति पाण्डेय द्वारा कहा गया कि संतुलित जीवन वर्तमान समय की आवश्यकता है। विद्यार्थी जीवन मानव जीवन का स्वर्णिम स्वर्णिम काल माना जाता है जो भविष्य की नींव गढ़ता है। ऐसे में किस प्रकार जीवन की द्वंदात्मक स्थितियों का सामना करते हुए अनुशासन, संयम, मानसिक एवं भावात्मक प्रबंधन, समाधान केंद्रित सकारात्मक सोच, परिवार के साथ शेयरिंग और केयरिंग अप्रोच, आत्मविश्लेषण,
और डिजिटल डिटॉक्स के माध्यम से जीवन में संतुलन स्थापित किया जाए,यही इस सेमिनार के आयोजन का उद्देश्य है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्रीमान माधव दास द्वारा विद्यार्थियों से तनाव प्रबंधन व्यक्तिगत एवं व्यवसायिक समस्याओं, करियर से संबंधित समस्याओं दैनिक जीवन से जुड़ी हुई समस्याओं का किस प्रकार निदान किया जाए, इस विषय में उन्होंने कहा कि चिंता, अकेलेपन, अवसाद में लगातार वृद्धि हो रही है। पश्चिमी देशों में यह समस्या ज्यादा है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से यह समस्या भारतवर्ष में भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। स्वयं की तुलना दूसरों से करना, केवल कमियों पर ध्यान देना, अधिक अपेक्षा रखना, 99 क्लब के अंतर्गत ही रहते हैं। स्वयं की पहचान करना और आत्म दृष्टि विकसित करना अत्यंत आवश्यक है ।विद्यार्थियों के साथ अंतर क्रिया करते हुए उन्होंने बीच-बीच में विद्यार्थियों से प्रश्न भी पूछे और उनकी समस्याओं का निदान भी किया। करियर या जीवन का संघर्ष हमारे जीवन के एक पक्ष मात्र है। जीवन के आंतरिक और वाह्य 8 आयामों पर विद्यार्थियों को केंद्रित होने के लिए कहा जिसमें साधना, स्वभाव ,संबंध ,सेवा, शिक्षा, सामर्थ्य,स्वास्थ्य तथा समय के महत्व को समझाया । इन बिंदुओं के स्पष्टीकरण के साथ ही साथ उन्होंने रामायण, महाभारत और गीता के अत्यंत महत्वपूर्ण तथा प्रैक्टिकल उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया। साधना के लिए आध्यात्मिक प्रेक्टिस, चेतनता का विकास , चित्त की स्थिरता जरूरी है।इसके लिए वैदिक ग्रंथों और पुस्तकों का अध्ययन करे, सफल लोगों के जीवन के अनुभवों से सीखे, स्वभाव में समय के अनुसार सुधार लाए, माता-पिता, भाई बहन, घर परिवार के सदस्यों के साथ गहरे संबंध स्थापित करे, जीवन में अधिक से अधिक खुशी प्राप्त करने के लिए आभार व्यक्त करे, विभिन्न संस्कृतियों की नई बातों को आत्मसात करे, व्यक्तिगत एवं व्यवसायिक जीवन के विकास हेतु कौशल और सामर्थ्य का विकास करे, स्वास्थ्यपर विशेष ध्यान दे, और समय का अधिक से अधिक सदुपयोग करना चाहिए ताकि जीवन में सदैव सकारात्मक सोच के साथ उद्देश्यों को आसानी से प्राप्त किया जा सके। व्याख्यान सत्र के अंत में उन्होंने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से माइंड मैनेजमेंट, मेडिटेशन ,स्पिरिचुअल डेवलपमेंट ,डीप ब्रीदिंग आदि का भी अभ्यास करवा। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो.के.पी.सिंह ने कहा कि
शैक्षिक परिवेश में छात्रों का तनाव प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में है ।तनाव के पैटर्न को समझना अत्यंत आवश्यक है। छात्रों के तनाव प्रबंधन के लिए उचित मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षिक सफलता और समग्र स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक है जिससे थकान, चिंता और दीर्घकालिक समस्याओं से बचा जा सकता है। शोध बताते हैं कि जीवन जीने की स्वस्थ आदतों को अपनाकर तनाव के स्तर को काफी काम किया जा सकता है। ध्यान केंद्रित करना एकाग्रता और निर्णय क्षमता को बढ़ाता है। यथार्थवादी लक्ष्य को निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करना सरल होता है। शोध एवं शिक्षा संबंधी कार्यों के बीच में उद्देश्य पूर्ण ब्रेक लेने से ऊर्जा और उत्पादकता बढ़ती है। ब्रेक के दौरान सोशल मीडिया से दूर रहकर, स्ट्रेचिंग, वॉकिंग या मेडिटेशन के माध्यम से तनाव प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है तथा संतुलित जीवन भी जिया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने स्क्रीन समय को सीमित करें, सकारात्मक और आंतरिक संवाद के माध्यम से स्वयं को जाने और नकारात्मक विचारों को सकारात्मक और रचनात्मक विचारों में परिवर्तित करने का प्रयास करें। प्रभावी अध्ययन विधियों के साथ-साथ स्वयं की उचित देखभाल की रणनीतियों को अपनाकर और माइंडफुलनेस अभ्यास के साथ संतुलित और संयमित जीवन शैली अपना कर विद्यार्थी अपनी क्षमताओं का विकास कर सकते हैं और इस प्रकार की युवा विकास की संगोष्ठियों के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को आत्म विश्लेषण एवं आत्मविकास का ऐसा प्लेटफॉर्म प्राप्त होता है जो उनका जीवन की द्वंदात्मक स्थितियों से उबार कर विकास और उन्नति की ओर अग्रसर करता है। अधिक से अधिक पुस्तक पढ़ना, मित्रों और परिवार के साथ समय व्यतीत करना, मेडिटेशन करना तथा अपने मन को वर्तमान में स्थित करने के अभ्यास पर उन्होंने बल दिया। मंच संचालन सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन श्री अकिंचन चैतन्यदास द्वारा दिया। गया। इस अवसर पर कुलसचिव श्री हरिश्चंद्र परीक्षा नियंत्रक श्री संजीव कुमार सिंह, प्रो. पी.वी. सिंह , प्रो संजय मिश्रा,प्रो. तूलिका सक्सेना, डॉ.ज्योति पाण्डेय, डॉ. सौरभ वर्मा, डॉ.सुनील कुमार, श्री अकिंचन चैतन्यदास, श्री तपन वर्मा , मनोज कुमार पाठक, डॉ. सचिन वर्मा,डॉ.पारस संतोषी, डॉ . नम्रता, डॉ. वैशाली, डॉ.नेहा, डॉ. नंदिता, डॉ.भावना, डॉ.हेमा, सहित शिक्षक, कर्मचारी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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