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पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये काम, पूर्वज हो सकते हैं नाराज! 16 दिनों के लिए जान लें क्या करें और क्या नहीं

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का विशेष समय माना जाता है। मान्यता है कि इन 16 दिनों में पितरों का तर्पण, श्राद्ध, दान और सेवा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं, इस दौरान कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है। ऐसे में पितृपक्ष के दौरान क्या करना चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए, इसकी जानकारी होना जरूरी है।

पितृपक्ष में किन कामों से बचना चाहिए?

पितृपक्ष के दौरान कई तरह के शुभ और नए कार्य करने से बचने की मान्यता है। ज्योतिष एक्सपर्ट और वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, इन दिनों में शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए और ऐसी गतिविधियों से दूरी रखनी चाहिए जिन्हें पितृपक्ष में वर्जित माना गया है।

नए और शुभ कार्य न करें

पितृपक्ष के 16 दिनों में शादी, सगाई, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं करने की मान्यता है। इसके अलावा इस अवधि में नई गाड़ी, जमीन या अन्य नई चीज खरीदने से भी बचना चाहिए।

मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से रहें दूर

पितृपक्ष के दौरान मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, इस अवधि में सात्विक भोजन करना और संयम बरतना उचित माना गया है।

गरीब, बुजुर्ग और असहाय का अपमान न करें

पितृपक्ष में घर आए किसी गरीब, असहाय व्यक्ति, बुजुर्ग या जानवर का अपमान नहीं करना चाहिए। साथ ही घर में कलह और अशांति से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान घर का शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।

दक्षिण-पश्चिम दिशा में गंदगी न रखें

पितृपक्ष के दौरान घर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से को साफ रखने की सलाह दी जाती है। इस जगह कबाड़, बेकार सामान या गंदगी नहीं रखनी चाहिए। वास्तु मान्यता के अनुसार, इस दिशा को साफ और व्यवस्थित रखना उचित माना जाता है।

पितृपक्ष में क्या करना चाहिए?

पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, दान और सेवा जैसे कार्य करने की परंपरा है। जरूरतमंदों की सहायता करने और भोजन कराने को भी इस अवधि में विशेष महत्व दिया जाता है।

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पंचबलि कर्म की है विशेष मान्यता

ज्योतिष एक्सपर्ट और वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, पितृपक्ष में भोजन करने से पहले देवताओं, गाय, कौए, कुत्ते और चींटी के लिए भोजन का अलग हिस्सा निकालने की परंपरा है। इसे पंचबलि कर्म कहा जाता है। मान्यता है कि कौए को पितरों का प्रतीक मानकर भोजन कराया जाता है।

दान और सेवा को माना गया है शुभ

पितृपक्ष में जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने और काले तिल तथा अनाज का दान करने की मान्यता है। शास्त्रों में अन्न दान को विशेष महत्व दिया गया है। इस दौरान अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करने की सलाह दी जाती है।

घर में बनाए रखें शांति और साफ-सफाई

पितृपक्ष के दौरान घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।

तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर रखें मुख

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितरों का संबंध दक्षिण दिशा से माना जाता है। इसलिए पितृपक्ष में तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख रखने की मान्यता है।

पूर्वजों की तस्वीर कहां लगाएं?

मान्यता के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीर मंदिर, बेडरूम या घर के मुख्य हॉल के बीच में नहीं लगानी चाहिए। तस्वीर को दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाने को उचित माना जाता है।

सूर्यास्त के बाद जलाएं तेल का दीपक

पितृपक्ष के दौरान सूर्यास्त के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाने की परंपरा बताई गई है। मान्यता है कि पितृपक्ष के नियमों का पालन करने और पूर्वजों के निमित्त किए गए कर्मों से परिवार में सुख-शांति और पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।

 

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