बीबीएयू में कोहा सॉफ्टवेयर पर पांच दिवसीय कार्यशाला शुरू, प्रतिभागी सीखेंगे डिजिटल लाइब्रेरी प्रबंधन
लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में सोमवार, 26 अक्टूबर को पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की ओर से कोहा इंटीग्रेटेड लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम पर पांच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को डिजिटल पुस्तकालय प्रबंधन की तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट, लखनऊ के कंसल्टेंट प्रोफेसर प्रो. पी.पी. रावत उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा डॉ. एस.आर. रंगनाथन के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलगीत का गायन किया गया। आयोजन समिति ने अतिथियों और मंचासीन शिक्षकों को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. विनीत कुमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विद्यापीठ की संकायाध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शरद कुमार सोनकर भी मौजूद रहे।
डिजिटल तकनीक से पुस्तकालय प्रबंधन होगा आसान: कुलपति
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल तकनीक का है और विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों का ज्ञान हासिल करना तथा अपने कौशल को लगातार विकसित करना जरूरी है। शिक्षा और शोध के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शैक्षणिक संस्थान का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। कोहा जैसे इंटीग्रेटेड लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए पुस्तकों के रिकॉर्ड, उपलब्धता, निर्गमन और वापसी सहित पुस्तकालय से जुड़े कार्यों को डिजिटल रूप से व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे समय की बचत होती है और विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा पुस्तकालय कर्मचारियों को सुविधाएं मिलती हैं।
कुलपति ने कार्यशाला के आयोजन के लिए विभाग को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि प्रतिभागी यहां प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास में करेंगे।
ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के व्यावहारिक उपयोग पर जोर

मुख्य अतिथि प्रो. पी.पी. रावत ने पुस्तकालय प्रबंधन प्रणालियों की कार्यप्रणाली और डिजिटल सेवाओं में उनकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसे सॉफ्टवेयर की मदद से पुस्तकों का डेटाबेस तैयार करने, वर्गीकरण, कैटलॉगिंग, निर्गमन और वापसी जैसे कार्यों को सुव्यवस्थित किया जा सकता है।
उन्होंने कोहा जैसे ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर की उपयोगिता बताते हुए प्रतिभागियों को इनकी तकनीकी जानकारी हासिल करने और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से अपने कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
संकायाध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा ने भी कहा कि ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर पुस्तकालयों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने, डेटा प्रबंधन में सटीकता बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायक हैं। उन्होंने पुस्तकालय सेवाओं के आधुनिकीकरण में डिजिटल टूल्स के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया।
विद्यार्थियों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने पर जोर
विभागाध्यक्ष प्रो. शरद कुमार सोनकर ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने के साथ उनके व्यावहारिक ज्ञान और कौशल को बढ़ाने में मदद करती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभाग भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के प्रयास करता रहेगा, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों को सीखने के अवसर मिलते रहें।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की ओर से अतिथियों और शिक्षकों को स्मृति चिह्न एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। डॉ. नीतेश कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. के.एल. महावर, डॉ. सोमीपेम आर. शिमरे सहित अन्य शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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