उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए

लखनऊ: राजकीय मेडिकल कॉलेजों/स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में परास्नातक व सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल/विंग में सपोर्टिंग डिपार्टमेन्ट्स तथा चिकित्सा विश्वविद्यालयों व सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों में स्नातक, परास्नातक तथा सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के दृष्टिगत पदों के सृजन हेतु मानदण्ड निर्धारण का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति की संस्तुतियों के क्रम में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियंत्रणाधीन राजकीय मेडिकल कॉलेजों/स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों में परास्नातक व सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल/विंग में सपोर्टिंग डिपार्टमेन्ट्स तथा चिकित्सा विश्वविद्यालयों व सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों यथा संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ, डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ, कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान एवं अस्पताल लखनऊ, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई इटावा तथा बाल चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान नोएडा में स्नातक, परास्नातक तथा सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के दृष्टिगत एम0सी0आई0/एन0एम0सी0 मानकों की पूर्ति एवं सम्बद्ध चिकित्सालय के सुगम संचालन के लिए न्यूनतम आवश्यक मानव संसाधन के पदों के सृजन हेतु मानदण्ड निर्धारण किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय भी लिया है कि मानदण्डों के आधार पर पदों का सृजन मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन से किया जाएगा। मानदण्डों से अधिक पदों की आवश्यकता होने पर अथवा भविष्य में नियामक मानदण्डों में कोई परिवर्तन होने की स्थिति में केस-टू-केस पूर्ववत व्यवस्था के अनुसार पदों का सृजन वित्त विभाग के परामर्श से ही किया जाएगा। यदि कोई ऐसा पद पूर्व में सृजित है, जो इस मानक में नहीं है, तो ऐसे पद कार्यरत कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के साथ शून्य/समर्पित समझे जाएंगे। पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तभी प्रारम्भ की जाएगी, जब वास्तविक कार्यात्मक आवश्यकता हो तथा यदि पूर्व से पद रिक्त हों, तो प्राथमिकता पर उन्हें पहले भरने की कार्यवाही की जाएगी।
प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना मंे अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। अतः भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एम0सी0आई0)/राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एन0एम0सी0)/स्टाफ इंस्पेक्शन्स यूनिट (एस0आई0यू0) के मानकानुसार वर्तमान में चिकित्सालय कार्यों के गुणवत्तापरक क्रियान्वयन तथा भविष्य में रोगियों की बढ़ती संख्या के दृष्टिगत राजकीय मेडिकल कॉलेजों/स्वशाासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों व सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थानों/विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक संवर्ग के पदों के सृजन हेतु मानकीकरण की आवश्यकता है। इस हेतु महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन कर एन0एम0सी0/एम0सी0आई0 तथा स्टाफ इंस्पेक्शन यूनिट द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार न्यूनतम पदों का आकलन किया गया।
समिति द्वारा की गयी संस्तुति के क्रम में चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियंत्रणाधीन संचालित चिकित्सा विश्वविद्यालयों व सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों यथा संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ, डा0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ, कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान एवं अस्पताल, लखनऊ, उ0प्र0 आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई इटावा तथा बाल चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान नोयडा तथा राजकीय मेडिकल कालेजों/स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में एन०एम०सी० मानकों की पूर्ति एवं चिकित्सालय के सुगम संचालन हेतु पाठ्यक्रमों की सीटों एवं बेडों की संख्या के आधार पर मानदण्ड निर्धारण का फार्मूला तय करते हुए न्यूनतम आवश्यक मानव संसाधन के पदों के सृजन हेतु मानदण्ड निर्धारण किये जाने की कार्यवाही की जा रही है, इससे चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में आवश्यकतानुसार विभिन्न श्रेणी के पदों के सृजन में सुगमता होगी और संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन समय से उपलब्ध कराया जा सकेगा।
प्रस्तावित पदों के सृजन पर 921.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्यय भार सम्भावित है। चूंकि वर्तमान में कुल सृजित पदों के सापेक्ष लगभग 60 प्रतिशत पद ही भरे हुए हैं। अतः निर्धारित मानदण्डों के अन्तर्गत सृजित होने वाले पदों पर यह व्यय भार तत्काल नहीं आएगा। अपितु चरणबद्ध रूप से भविष्य में इसकी व्यवस्था की जाएगी।
प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों/स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों व सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थानों/विश्वविद्यालयों में प्रस्तावित मानदण्डांे के अन्तर्गत पदों के सृजन से मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इससे प्रदेश की जनता को इन चिकित्सा संस्थानों में बेहतर चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी तथा मेडिकल पाठ्यक्रमों में शिक्षण-प्रशिक्षण का कार्यक्रम सुचारु रूप से सम्पादित किया जा सकेगा।
मंत्रिपरिषद की बैठक के पश्चात निर्णयों के सम्बन्ध में मीडिया को जानकारी देते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इस निर्णय से 10,000 शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक पदों का सृजन होगा।
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वाहनों की तकनीकी स्वस्थता के लिए वाहनों की जांच हेतु स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ए0टी0एस0) की मान्यता, विनियमन और नियंत्रण सम्बन्धी प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में वाहनों की तकनीकी स्वस्थता सुनिश्चित करने के लिए वाहनों की जांच हेतु स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ए0टी0एस0) की मान्यता, विनियमन और नियंत्रण सम्बन्धी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 56(2) में अधिकृत परीक्षण स्टेशन का प्राविधान किया गया है। इस प्राविधानानुसार ‘प्राधिकृत परीक्षण केन्द्र’ से तात्पर्य राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत स्वचालित परीक्षण प्रसुविधा (स्टेशन) सहित किसी ऐसी सुविधा से है, जहां पर केन्द्र सरकार द्वारा ऐसे स्टेशनों की मान्यता, विनियमन और नियंत्रण हेतु निर्मित नियमों के अनुसार स्वस्थता-परीक्षण संचालित किया जा सके।
भारत सरकार की अधिसूचना संख्या-जी0एस0आर0-652ई, दिनांक 23 सितम्बर, 2021 द्वारा केन्द्रीय मोटरयान नियमावली में संशोधन करते हुए स्वचालित परीक्षण स्टेशन की मान्यता, विनियमन व नियंत्रण हेतु नियमावली प्रख्यापित की गयी, जो दिनांक 25 सितम्बर, 2021 से प्रभावी है।
स्वचालित परीक्षण स्टेशन की स्थापना, विनियमन व नियंत्रण हेतु यद्यपि भारत सरकार द्वारा निर्गत नियमावली में विस्तृत प्राविधान किये गये है, किन्तु कतिपय बिन्दुओं पर स्पष्टता नहीं है। फलस्वरूप प्रासंगिक आवश्यकता के दृष्टिगत प्रदेश में स्वचालित परीक्षण स्टेशन की मान्यता, विनियमन और नियंत्रण सम्बन्धी प्रस्ताव मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया गया।
प्रस्ताव में सम्मिलित तकनीकी बिन्दुओं के अतिरिक्त मुख्य बिन्दु यह है कि भारत सरकार द्वारा निर्गत नियमावली में स्वचालित परीक्षण स्टेशनों की संख्या के निर्धारण का कोई प्राविधान न होने के दृष्टिगत प्रथम चरण में प्रदेश के प्रत्येक जनपद में (लखनऊ, कानपुर नगर एवं आगरा जहां राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन स्वचालित परीक्षण स्टेशन संचालित/प्रस्तावित है, को छोड़कर) प्रारम्भिक तौर पर 01-01 स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ए0टी0एस0) स्थापित किये जाएंगे। किन्तु भविष्य में आवश्यकता के अनुसार स्वचालित परीक्षण स्टेशन की संख्या में वृद्धि का विकल्प खुला रहेगा।
किसी भी आवेदक को उसके द्वारा वर्तमान में प्रदेश में संचालित स्टेशन को सम्मिलित करते हुए अधिकतम 02 स्वचालित परीक्षण स्टेशन ही आवंटित किये जाएंगे। किन्तु यह प्रतिबन्ध राज्य सरकार पर प्रभावी नहीं होगा।
पूर्व में, मोटरयानों का परीक्षण मैन्युअल होता था। स्वचालित परीक्षण स्टेशन की स्थापना से मोटरयानों का परीक्षण तेजी से किया जा सकेगा। साथ ही, परीक्षण में पारदर्शिता आएगी तथा अनियमितता की सम्भावना न्यूनतम हो जाएगी। मशीनों द्वारा वाहनों की तकनीकी स्वस्थता सुनिश्चित होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और आमजन को सुरक्षित परिवहन की सुविधा का लाभ मिलेगा।
मंत्रिपरिषद की बैठक के पश्चात निर्णयों के सम्बन्ध में मीडिया को जानकारी देते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि प्रदेश के सभी जनपदों में पी0पी0पी0 मोड पर स्वचालित परीक्षण स्टेशन की स्थापना से लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। इससे लगभग 1,500 रोजगार सृजित होंगे।
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प्रदेश के 62 जनपदों में 2100 नवीन राजकीय नलकूप निर्माण परियोजना अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के विभिन्न 62 जनपदों में 2100 नवीन राजकीय नलकूप निर्माण परियोजना की व्यय वित्त समिति द्वारा अनुमोदित लागत 84198.83 लाख रुपये (जी0एस0टी0 सहित) के व्यय प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश में 87 प्रतिशत नेट क्रॉप एरिया का सिंचन किया जा रहा है। 13 प्रतिशत नेट क्रॉप एरिया को सिंचन सुविधा उपलब्ध नहीं है। प्रदेश मेें कुल 143.37 लाख हेक्टेयर में से 107.30 लाख हेक्टेयर एरिया का सिंचन, राजकीय नलकूपों एवं निजी नलकूपों के माध्यम से किया जा रहा है। इससे यह परिलक्षित है कि 74.90 प्रतिशत सिंचाई निजी एवं राजकीय नलकूपों के माध्यम से की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 34,316 राजकीय नलकूपों द्वारा कृषकों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
सिंचन क्षमता को बढ़ाने तथा लघु एवं सीमान्त कृषकों के हित में जन प्रतिनिधियों तथा स्थानीय कृषकों की मांग के दृष्टिगत, परिक्षेत्र स्तर पर 1.0 क्यूसेक क्षमता के नवीन राजकीय नलकूप प्रदेश के 62 जनपदों के भूगर्भ जल सुरक्षित विकासखण्डों में 2100 नवीन राजकीय नलकूपों के निर्माण की परियोजना गठित की गई है। इसकी कुल लागत 84198.83 लाख रुपये (जी0एस0टी0 सहित) है। परियोजना के अन्तर्गत किसी डार्क अथवा ग्रे ब्लॉक में नलकूप स्थापित करने की योजना नहीं है।
परियोजना के अन्तर्गत निर्मित होने वाले प्रत्येक नलकूप पर रिमोट सेंसिंग (रजिस्टिविटी सर्वे एवं लॉगिंग आदि), ड्रिलिंग, डेवलपमेन्ट, पम्पहाउस का निर्माण, डिलीवरी टैंक, हेडर एवं जल वितरण प्रणाली के अन्तर्गत 1.2 किलोमीटर भूमिगत पी0वी0सी0 पाइप लाइन के बिछाने, 10 आउटलेट का निर्माण तथा ऊर्जीकरण का कार्य कराया जाना है। परियोजना वर्ष 2022-23 से प्रारम्भ होकर वर्ष 2023-24 तक पूर्ण की जाएगी। इसके पूर्ण होने पर 50 हेक्टेयर प्रति राजकीय नलकूप की दर से 105000 हेक्टेयर की सिंचन क्षमता में वृद्धि होगी। परियोजना के अन्तर्गत राजकीय नलकूपों के निर्माण कार्य से श्रमिकों हेतु 21 लाख मानव दिवस के रोजगार का सृजन सम्भावित है।
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अवर्षण/कमजोर मानसून की स्थिति में राज्य पोषित प्रमाणित बीजों पर अनुदान की योजना के अन्तर्गत तोरिया के निःशुल्क बीज मिनीकिट वितरण की कार्ययोजना अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने अवर्षण/कमजोर मानसून की स्थिति में राज्य पोषित प्रमाणित बीजों पर अनुदान की योजना के अन्तर्गत तोरिया के निःशुल्क बीज मिनीकिट वितरण की कार्ययोजना तथा निःशुल्क बीज मिनी किट वितरण हेतु प्रमाणित बीजों पर अनुदान के मद से 457.60 लाख रुपये की धनराशि की व्यवस्था के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
प्रदेश में अवर्षण/कमजोर मानसून के दृष्टिगत जिन क्षेत्रों/जनपदों में खरीफ की बुवाई नहीं हो पा रही है। ऐसे क्षेत्रों में अवशेष आच्छादन की पूर्ति हेतु कृषकों को तोरिया के निःशुल्क बीज मिनीकिट का वितरण किया जायेगा। निःशुल्क बीज मिनीकिट के वितरण में लघु, सीमान्त कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस योजना के अन्तर्गत 100 प्रतिशत राज्य सहायता के आधार पर 02.00 किग्रा प्रति पैकेट तोरिया बीज मिनीकिट का कृषकों को निःशुल्क वितरण किया जायेगा।
तोरिया के निःशुल्क बीज मिनीकिट का वितरण पूर्ण पारदर्शिता के साथ ग्राम पंचायतों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के सहयोग एवं उनकी उपस्थिति में कराया जायेगा।
तोरिया के निःशुल्क बीज मिनीकिट का वितरण जनपदों में 25 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित-जनजाति के कृषकों तथा शेष अन्य कृषकों में किया जाएगा। यह प्रयास किया जाएगा कि चयनित कृषकों में 30 प्रतिशत महिला कृषकों की भागीदारी सुनिश्चित हो। इस सुविधा का लाभ कृषकों को ‘प्रथम आवक-प्रथम पावक’ के आधार पर उपलब्ध कराया जायेगा।
योजना के क्रियान्वयन से लगभग 04 लाख कु0 अतिरिक्त तोरिया का उत्पादन प्राप्त होगा तथा लाभार्थी कृषकों को औसतन 8000 रुपये प्रति हेक्टेयर का लाभ मिलेगा।
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राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के चयन के सम्बन्ध में निर्धारित गाइडलाइन्स में संशोधन का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने माध्यमिक विद्यालयों में योग्यता को बढ़ावा देने हेतु राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के चयन के सम्बन्ध में निर्धारित गाइडलाइन्स में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
राज्य अध्यापक पुरस्कार के अन्तर्गत विद्यालयों के उचित प्रबन्धन/संचालन तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के दृष्टिगत प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक तथा अध्यापकों की संख्या का प्रतिनिधित्व के आधार पर विषय/वर्गवार पृथक-पृथक मानक का निर्धारण किया गया है। पूर्व निर्धारित मूल्यांकन मानक विषयनिष्ठ (सब्जेक्टिव) हैं, जिन्हें वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव) किया गया है। प्रधानाचार्य/ प्रधानाध्यापक के मूल्यांकन मानक तथा अध्यापक के लिए विषयवार/वर्गवार आकलन/मूल्यांकन का निर्धारण कर उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है। संशोधित नीति में निर्धारित 18 पुरस्कारों में 02-02 पुरस्कार प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक तथा शेष 14 पुरस्कार शिक्षक के लिए विषयवार/वर्गवार निर्धारित किये गये हैं।
राज्य अध्यापक पुरस्कार की संशोधित गाइडलाइन्स में यह व्यवस्था भी की गई है कि पूर्व में जनपद/मण्डल /राज्य स्तर पर गठित चयन समितियों के अतिरिक्त, निदेशालय स्तर पर चयन समिति का गठन किया जायेगा, जिससे सीमित संस्तुतियां राज्य चयन समिति में प्राप्त हों। समय सारणी को और अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अलावा, केन्द्र अथवा अन्य राज्य सरकारों अधीन राजकीय/सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नियमित रूप से की गई सेवा को मान्य किया गया है, परन्तु पुरस्कार का आकलन प्रदेश में किये गये शिक्षण कार्य के आधार पर किया जायेगा। पूर्व में आवेदन हेतु निर्धारित अर्हक अंक 40 प्रतिशत को संशोधित करते हुए न्यूनतम 50 प्रतिशत अर्हक अंक निर्धारित किया गया है। पूर्व में, बोर्ड परीक्षाफल 05 वर्षों का उल्लेख है, किन्तु वर्ष एवं परीक्षाफल का प्रतिशत निर्धारित नहीं है। इसे संशोधित करते हुए 05 वर्षों का बोर्ड परीक्षाफल जो प्रत्येक वर्ष 90 प्रतिशत से कम न हो, निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिये संशोधित गाइडलाइन्स के अन्तर्गत पूर्व में 25 दिसम्बर अथवा मुख्यमंत्री जी द्वारा निर्धारित तिथि प्रदान किये जाने के उपरान्त पुरस्कार दिये जाने की व्यवस्था निर्धारित है। स्ववित्त पोषित विद्यालय के शिक्षकों को विगत दो वर्षों से 05 सितम्बर शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया है। अतः उक्त तिथि पर पुरस्कार दिया जायेगा। पूर्व में प्रतिमण्डल एक अर्थात कुल 18 शिक्षकों को पुरस्कार दिये जाने की व्यवस्था निर्धारित है। पुरस्कार के चयन हेतु संशोधित व्यवस्था में प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक के लिए पृथक-पृथक मानक एवं अध्यापक हेतु विषय/वर्गवार मानक का निर्धारण किया गया है।
पूर्व में मण्डल/राज्य स्तर पर चयन समिति गठित है। चयन पक्रिया की पारदर्शिता हेतु मण्डल/राज्य स्तरीय चयन समिति के अतिरिक्त जनपद/निदेशालय स्तर पर चयन समिति गठित की गई है। जनपद/मण्डल स्तर पर चयन हेतु स्ववित्त पोषित विद्यालय के एक प्रधानाचार्य, जो स्वयं आवेदक न हो, को सदस्य के रूप में सम्मिलित किया गया है। पूर्व निर्धारित मूल्यांकन मानक विषयनिष्ठ (सब्जेक्टिव) हैं, जिन्हें वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव) किया गया है।
पूर्व व्यवस्था मंे दिशा-निर्देश/मूल्यांकन मानक निर्धारित नहीं है। नवीन व्यवस्था में व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु जनपद स्तर पर सर्वाधिक प्रचलित दो समाचार पत्रों में विज्ञापन, मूल्यांकन हेतु निर्धारित मानदण्डों के मानक के सम्बन्ध में संगत अभिलेखों का सत्यापन, आवेदन हेतु न्यूनतम 50 प्रतिशत अर्ह अंक निर्धारित विगत 05 वर्षों का बोर्ड परीक्षाफल, जो 90 प्रतिशत से कम न हो, आपराधिक पृष्ठभूमि हेतु एल0आई0यू0 की जांच रिपोर्ट अनिवार्य तथा सामान्य ख्याति के सम्बन्ध में परीक्षण तथा उत्कृष्ट कार्यों का प्रस्तुतीकरण किये जाने की व्यवस्था निर्धारित की गई है।

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