देवउठनी एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये काम!, जानें इस दिन क्या करें क्या नहीं

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का काफी महत्व माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की नींद से जागते हैं। इसलिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को धूम-धाम से मनाया जाता है। इस साल 4 नवंबर, शुक्रवार को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन भगवान शालीग्राम और माता तुलसी का विवाह करवाया जाता है। लेकिन आपको बता दें कि देवउठनी एकादशी के दिन कुछ कार्यों को करने की मनाही है। तो आइए जानते हैं कि देवउठनी एकादशी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं-

देवउठनी एकादशी पर क्या करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन गंगा स्नान और दान करना शुभ होता है।
एकादशी के दिन ब्राह्मण भोजन कराना शुभ होता है।

देवउठनी एकादशी के दिन हल्दी, केला और केसर का दान करना चाहिए, मान्यता है कि इस दिन ऐसा करने से विवाह संबंधी परेशानियां दूर होती है।
एकादशी के दिन व्रत करने से मन शांत और स्थिर रहता है। इसके साथ ही धन, मान-सम्मान और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

देवउठनी एकादशी के दिन क्या ना करें
देवउठनी एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से अगले जन्म में रेंगने वाले जंतु की योनि मिलती है।

देवउठनी एकादशी के दिन अपने बड़े या छोटे किसी का भी अपमाना ना करें। ऐसा करने से दूसरों का अपमान या उपहास करने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु नाराज हो जाते हैं।

देवउठनी एकादशी के दिन किसी से भी लड़ाई या झगड़ा करने से बचना चाहिए। मान्यतानुसार, इस दिन लड़ाई-झगड़ा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।

देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से परहेज करना चाहिए। अगर इस दिन आपको भगवान को तुलसी अर्पित करना है तो एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़े कर रख लें।

एकादशी के दिन सिर्फ सात्विक भोजन करने का विधान है। इस दिन व्रत रखते हैं, लेकिन जो लोग इस दिन व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें भी देवउठनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन से बचना चाहिए।

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