न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में दवा से उन्नत हस्तक्षेप तक पर मंथन, एमिटी लखनऊ में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

लखनऊ: एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के लखनऊ परिसर की ओर से इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोसाइंसेज (आईएएन), लखनऊ चैप्टर के सहयोग से 8 और 9 सितंबर 2026 को ‘न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर: दवा से हस्तक्षेप तक’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों और विद्यार्थियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, जहां तंत्रिका संबंधी विकारों की समझ, निदान, उपचार और पुनर्वास में हो रही प्रगति पर चर्चा की जा सके।

विशेषज्ञों ने न्यूरोलॉजिकल देखभाल में सहयोग पर दिया जोर
संगोष्ठी का उद्घाटन प्रोफेसर (डॉ.) ईशान पात्रो, आईसीएमआर एमेरिटस साइंटिस्ट, जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर और रेवेनशॉ विश्वविद्यालय, कटक के पूर्व कुलपति तथा इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोसाइंसेज के पूर्व अध्यक्ष और प्रोफेसर (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, प्रो वाइस चांसलर, एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश, लखनऊ परिसर की मौजूदगी में किया गया। कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार (सेवानिवृत्त), उप प्रो-कुलपति एवं निदेशक एएसईटी, प्रो. (डॉ.) राजेश के. तिवारी, डीन अकादमिक एवं निदेशक, एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी तथा प्रो. (डॉ.) जे.के. श्रीवास्तव, उप-डीन अनुसंधान और एचओआई एवं एचओडी भी मौजूद रहे।
उद्घाटन सत्र में न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, न्यूरोसाइंटिस्ट, पुनर्वास विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच अंतःविषय सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। चर्चा में शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान से जुड़ी चुनौतियों, पुनर्वास और मरीजों की बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए दीर्घकालिक प्रबंधन जैसे विषय शामिल रहे।
आईएएन अध्यक्ष डॉ. विनय के. खन्ना रहे मुख्य अतिथि
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आईएएन के अध्यक्ष डॉ. विनय के. खन्ना रहे, जो सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक हैं। उनके साथ आईएएन लखनऊ शाखा के अध्यक्ष डॉ. पीके दलाल, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के हृदय एवं मनोचिकित्सा विभाग के पूर्व प्रोफेसर तथा सचिव प्रो. (डॉ.) शादाब रजा, स्टेम सेल बायोलॉजी एवं पुनर्योजी चिकित्सा विभाग, एरा के लखनऊ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, एरा विश्वविद्यालय भी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञ वक्ताओं ने न्यूरोलॉजिकल विकारों के निदान और प्रबंधन में हो रहे नवीनतम विकास की जानकारी साझा की। वक्ताओं ने औषधीय प्रबंधन से लेकर उन्नत हस्तक्षेप तकनीकों तक विकसित हो रहे उपचार के नए तरीकों पर भी प्रकाश डाला।
रोगी देखभाल और तंत्रिका स्वास्थ्य में साक्ष्य आधारित रणनीतियों पर चर्चा
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आपसी सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही रोगी देखभाल और तंत्रिका संबंधी स्वास्थ्य परिणामों में सुधार के लिए साक्ष्य आधारित रणनीतियों के विकास पर भी जोर दिया गया। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. प्राची श्रीवास्तव और सह-संयोजक डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव के प्रयासों की अतिथियों ने सराहना की।
संगोष्ठी में प्रो. (डॉ.) सैयद शादाब रजा, एरा के लखनऊ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, प्रो. (डॉ.) आनंद प्रकाश, पूर्व कुलपति एमजीसीयू, प्रोफेसर एवं प्रमुख, बिहार, प्रो. (डॉ.) पंकज सेठ, वैज्ञानिक- VII एवं वरिष्ठ प्रोफेसर, राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र, मानेसर, गुरुग्राम, प्रो. (डॉ.) सुमन जैन, एम्स दिल्ली, डॉ. फाल्गुनी अल्लादी, वैज्ञानिक जी, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु, डॉ. कौशिक प्रमोद शर्मा, एचआईएमएस, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, देहरादून, डॉ. रस्तम के.एस., फिजियोलॉजी विभाग, कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मैंगलोर और डॉ. सृष्टि महापात्रा, एमबीबीएस, एमडी (आंतरिक चिकित्सा) सहित कई विशेषज्ञ आमंत्रित वक्ताओं के रूप में शामिल हुए।
दो दिवसीय आयोजन में शोध और नए उपचार तरीकों पर फोकस
यूके वैलेडिक्टरी सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) रजत संधीर, निदेशक, बायोकेमिस्ट्री विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ हैं। दो दिवसीय संगोष्ठी में प्रतिभागियों को शोध निष्कर्ष साझा करने, नए उपचार तरीकों को समझने और साक्ष्य आधारित न्यूरोलॉजिकल देखभाल को मजबूत करने के उद्देश्य से पेशेवर एवं अकादमिक सहयोग विकसित करने के अवसर मिलेंगे।
संगोष्ठी के आयोजन में डॉ. ज्योति प्रकाश, डॉ. रचना चतुर्वेदी, डॉ. मनीष द्विवेदी और डॉ. रुचि यादव ने सहयोग दिया। छात्र स्वयंसेवकों सुश्री श्रीजल, सुश्री संजना, सुश्री अनुष्का, सुश्री जाह्नवी, श्री संकल्प, श्री अमन और श्री शशांक ने भी कार्यक्रम के संचालन में सक्रिय भागीदारी की।
