पोर्शे में बड़ी छंटनी की तैयारी, 9 हजार नौकरियों पर संकट; पैरेंट कंपनी फॉक्सवैगन भी घटाएगी 1 लाख जॉब्स
नई दिल्ली: लग्जरी स्पोर्ट्स कार बनाने वाली कंपनी पोर्शे बड़े स्तर पर अपने कारोबार का पुनर्गठन करने की तैयारी में है। कंपनी 2030 तक करीब 9,000 नौकरियों में कटौती कर सकती है, जो उसके कुल कर्मचारियों का लगभग 25 फीसदी है। पहले से घोषित कटौती को जोड़ने पर कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या में कमी करीब 30 फीसदी तक पहुंच सकती है। चीन में बिक्री घटने और इलेक्ट्रिक वाहनों की रणनीति में महंगे बदलावों के चलते कंपनी पर दबाव बढ़ा है। दूसरी ओर, उसकी मूल कंपनी फॉक्सवैगन समूह भी करीब 1 लाख नौकरियां कम करने की योजना पर काम कर रही है।
कम कारें बेचकर ज्यादा कमाई पर जोर

पोर्शे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल लीटर्स ने 7 अक्टूबर को स्टटगार्ट के पास कंपनी के वाइसाख विकास केंद्र में पूंजी बाजार दिवस के दौरान नई रणनीति पेश की। ‘Sportwagenschmiede ’35’ नाम की इस योजना के तहत कंपनी का जोर कम संख्या में वाहन बेचकर ज्यादा कमाई करने पर होगा।
यानी पोर्शे अब केवल बिक्री का आंकड़ा बढ़ाने के बजाय महंगे और ज्यादा मुनाफा देने वाले मॉडलों पर ध्यान केंद्रित करेगी। कंपनी को उम्मीद है कि इस रणनीति से लंबे समय में उसकी कमाई और लाभप्रदता में सुधार होगा।
ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में भारी गिरावट
पोर्शे की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पिछले साल घटकर सिर्फ 1.1 फीसदी रह गया, जबकि 2023 में यह 18 फीसदी था। अब कंपनी का लक्ष्य लंबे समय में इसे दोबारा 10 से 15 फीसदी के बीच लाना है।
कंपनी का कहना है कि इस सुधार में कई साल लग सकते हैं। खर्च घटाने के लिए उत्पादन कर्मचारियों की लागत में 30 फीसदी तक और विकास लागत में 20 फीसदी तक कटौती की योजना है। इसके अलावा प्रबंधन स्तर के पदों में करीब 40 फीसदी तक कमी की जा सकती है।
चीन में बिक्री गिरने से बढ़ी मुश्किल
पोर्शे की मौजूदा परेशानी में चीन का बाजार बड़ी भूमिका निभा रहा है। 2026 की पहली छमाही में चीन में कंपनी की बिक्री करीब एक-तिहाई घट गई। चीन कभी पोर्शे की कुल वैश्विक बिक्री में एक-तिहाई से ज्यादा योगदान देता था, लेकिन 2030 तक कंपनी को उम्मीद है कि यह हिस्सा घटकर करीब 10 फीसदी रह सकता है।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल लीटर्स के मुताबिक पुराने बिक्री स्तर पर किसी भी कीमत पर लौटने की कोशिश करना पोर्शे के ब्रांड के लिए फायदेमंद नहीं होगा। इसी वजह से कंपनी अब बिक्री की संख्या के बजाय प्रीमियम मॉडलों और मुनाफे पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
महंगी होंगी पोर्शे की कारें
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नई रणनीति के तहत पोर्शे कम लेकिन ज्यादा महंगे वाहन बेचने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी खास तौर पर 911 जैसे हाई-एंड स्पोर्ट्स कार मॉडलों पर अपना ध्यान बढ़ाएगी। शीर्ष मॉडलों की औसत कीमत करीब 20 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही कारों के मॉडल और उनके अलग-अलग संस्करणों की संख्या में करीब 20 फीसदी तक कमी की जा सकती है। कंपनी अब सालाना 2 लाख से कम वाहन बेचकर भी लागत और मुनाफे के बीच बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश करेगी। पिछले साल पोर्शे ने दुनियाभर में 2,79,449 वाहन वितरित किए थे।
इलेक्ट्रिक और प्रीमियम मॉडल पर दांव
पोर्शे अपनी उत्पाद रणनीति में भी बड़े बदलाव करने जा रही है। कंपनी 2028 में इलेक्ट्रिक 718 बॉक्सस्टर और केमैन मॉडल पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा एक नए पेट्रोल इंजन वाले एसयूवी मॉडल और 911 से ऊपर के स्तर पर रखे जाने वाले सुपरकार प्लेटफॉर्म पर भी काम किया जा रहा है।
कंपनी का लक्ष्य इन प्रीमियम मॉडलों के जरिए मांग और मुनाफे को मजबूत करना है। यानी पोर्शे बड़े पैमाने पर बिक्री करने के बजाय सीमित संख्या में ज्यादा कीमत वाले वाहनों के जरिए बेहतर कमाई की रणनीति अपना रही है।
फॉक्सवैगन समूह में भी 1 लाख नौकरियों पर संकट
पोर्शे की मुश्किलों का असर उसकी मूल कंपनी फॉक्सवैगन समूह पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, फॉक्सवैगन के पास पोर्शे की 75 फीसदी हिस्सेदारी है और वह पूरे समूह में करीब 1 लाख नौकरियां कम करने की योजना पर काम कर रही है।
ऐसे में पोर्शे में प्रस्तावित करीब 9 हजार नौकरियों की कटौती को कंपनी की व्यापक लागत घटाने और कारोबार को ज्यादा मुनाफे वाला बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में कंपनी का फोकस कम उत्पादन, महंगे प्रीमियम मॉडल और बेहतर लाभ मार्जिन पर रहने वाला है।
