Featured Newsबिजनेस

1 नवंबर से GST नियमों में बदलाव की तैयारी, छोटे कारोबारियों को मिलेगी राहत; रिटर्न और रिफंड होंगे आसान

नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार कई सुधारों पर काम कर रही है। इनका मकसद छोटे कारोबारियों की कागजी कार्रवाई कम करना, टैक्स रिफंड में तेजी लाना और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बदलावों के लिए कानून में संशोधन की जरूरत नहीं है, उन्हें 1 नवंबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। वहीं, कानूनी संशोधन वाले प्रस्तावों के लिए 1 अप्रैल 2027 का लक्ष्य रखा गया है।

मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के सदस्य संजय मंगल ने इन सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना की जानकारी दी है। प्रस्तावित व्यवस्था से छोटे व्यापारियों को अनुपालन संबंधी कामकाज में राहत मिल सकती है। इसके साथ ही सरकार फर्जी इनवॉइस और गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने के मामलों पर लगाम लगाने की तैयारी भी कर रही है।

छोटे कारोबारियों को साल में एक बार रिटर्न दाखिल करने की सुविधा

प्रस्तावित सुधारों में छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाना अहम है। जीएसटी काउंसिल ने सालाना 5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले पात्र कारोबारियों के लिए सालाना रिटर्न की व्यवस्था को मंजूरी दी है, जो सीधे ग्राहकों को सामान या सेवाएं बेचते हैं। इसे बिजनेस-टू-कंज्यूमर यानी B2C सप्लाई कहा जाता है।

इस व्यवस्था के तहत पात्र कारोबारियों को साल में एक बार रिटर्न दाखिल करना होगा, जबकि टैक्स का भुगतान हर तीन महीने में करना होगा। इससे बार-बार रिटर्न भरने की जरूरत कम हो सकती है और छोटे व्यापारियों का समय बचेगा।

इसके अलावा, 5 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले छोटे कारोबारियों को लेट फीस में राहत देने का भी प्रावधान है। निर्धारित देय तारीख वाले महीने के भीतर रिटर्न दाखिल करने पर, प्रस्तावित नियमों के अनुसार, उन्हें लेट फीस से छूट मिल सकती है। हालांकि, इसका लाभ संबंधित शर्तें और प्रावधान लागू होने के बाद ही मिलेगा।

कुछ मामलों में अपने आप मंजूर हो सकता है टैक्स रिफंड

जीएसटी सुधारों का एक प्रमुख उद्देश्य टैक्स रिफंड की प्रक्रिया को तेज करना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र मामलों में रिफंड को स्वतः मंजूरी देने की सुविधा शुरू की जा सकती है। इससे कारोबारियों को अपने रिफंड के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुविधा भविष्य में दाखिल किए जाने वाले पात्र रिफंड दावों पर लागू होगी। पहले से लंबित रिफंड के मामलों को इस व्यवस्था में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए जरूरी तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां की जाएंगी।

गिरफ्तारी और अभियोजन से जुड़े नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव

जीएसटी के कुछ कानूनी प्रावधानों में संशोधन की जरूरत होगी। ऐसे बदलावों को 1 अप्रैल 2027 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें गिरफ्तारी से जुड़े कुछ प्रावधानों को हटाने, अभियोजन की सीमा को तर्कसंगत बनाने और ई-वे बिल के नियमों में संशोधन जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

इसके अलावा, कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा तय करने का प्रस्ताव भी है। इसका उद्देश्य छोटे मामलों में अनावश्यक कानूनी कार्रवाई को कम करना और करदाताओं के लिए नियमों को स्पष्ट बनाना है। प्रस्तावित बदलावों से पहले हो चुकी गिरफ्तारियों पर असर नहीं पड़ने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

फर्जी इनवॉइस और गलत ITC दावों पर सख्ती

सरकार जीएसटी के तहत फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने के मामलों पर रोक लगाने के लिए तकनीक आधारित जांच व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है। इसके तहत आपूर्तिकर्ताओं की ओर से घोषित टैक्स के भुगतान पर नजर रखने और खरीदारों के आईटीसी दावों में गड़बड़ी की आशंका कम करने पर जोर दिया जा रहा है।

इसका उद्देश्य जीएसटी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और कर चोरी पर अंकुश लगाना है। साथ ही, वास्तविक कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए नियमों का पालन करना आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल GST की टैक्स दरों में बदलाव नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स दरों में बदलाव का फैसला नहीं हुआ। बैठक में मुख्य रूप से कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान बनाने, आईटीसी से जुड़ी समस्याएं कम करने और रिफंड में तेजी लाने जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया।

टैक्स दरों में बदलाव पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है। इस विषय पर अगली बैठक में चर्चा हो सकती है, लेकिन उसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में छोटे कारोबारियों को प्रस्तावित प्रक्रियागत सुधारों से राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि टैक्स दरों में बदलाव के लिए अभी इंतजार करना होगा।

 

---------------------------------------------------------------------------------------------------   https://www.youtube.com/watch?si=RtToJsBhYBatUrym&v=mOuYNSdhjHA&feature=youtu.be