सर्दियों में आखिर क्यों हो रही इतनी खांसी!, कोरोना कनेक्शन या कुछ और, पढे पूरी अपडेट

नई दिल्ली : एक पुराना गाना है, हिच-हिच-हिचकी लगी। वैसे हिचकी से ज्यादा परेशानी तो नहीं होती, लेकिन इसी रफ्तार से अगर खांसी होने लगे, बलगम आने लगे, दम फूलने लगे तो बहुत दिक्कत हो जाती है। खांसी से नींद खराब, सिर दर्द, बदन दर्द और कई बार आसपास के लोग भी परेशान हो जाते हैं। इन दिनों खांसी होने के काफी मामले आ रहे हैं। किसी को सूखी खांसी है तो किसी को बलगम वाली। वहीं किसी को पहले सूखी तो बाद में बलगम वाली और कई को खांसी के साथ बुखार भी है। एक बार खांसी शुरू हो जाए तो आसानी से जा नहीं रही। लोग भ्रमित हो गए हैं कि आखिर चक्कर क्या है?

आजकल चीन, अमेरिका आदि देशों में कोरोना ने कहर बरपाया हुआ है। कोरोना के प्रमुख लक्षणों में खांसी भी एक लक्षण माना जाता है। भारत ने कोरोना की अल्फा, डेल्टा जैसी वेव देखी हैं। उस समय भी बुखार के साथ खांसी एक अहम लक्षण था। ऐसे में जब किसी को खांसी हो रही है तो उसका सबसे पहला शक इसी पर जाता है कि कहीं यह खांसी भी कोरोना से जुड़ी हुई तो नहीं है? यह सोचकर वे डर भी जाते हैं। हालांकि इन दिनों हो रही खांसी कोरोना से जुड़ी हुई नहीं है। चूंकि देश में अभी बमुश्किल रोजाना 200 मामले ही कोरोना के आ रहे हैं, ऐसे में इस बात की आशंका न के बराबर है कि इतने लोगों को कोरोना की वजह से खांसी हो। ऐसे में सवाल यही है कि इस बार यह ज़िद्दी खांसी जो एक बार हो जाए तो दो-दो हफ्ते तक जाने का नाम नहीं लेती, वह क्या है? दरअसल, यह इन्फ्लुएंजा-A वायरस का इन्फेक्शन है। इन्फ्लुएंजा-A सामान्य वायरल फीवर से ज्यादा मजबूत, लेकिन कोरोना और स्वाइन फ्लू के इन्फेक्शन से कमजोर होता है। यह बहुत ही कम मामलों में खतरनाक है। लेकिन आजकल इसकी वजह से हो रही खांसी बहुत परेशानी कर रही है।

ठंडी चीजों से जितना बचेंगे, उतना ही बेहतर होगा। खासकर फ्रिज में रखी चीजों से। इसके अलावा ठंडी हवा चलने पर कानों को भी ढककर रखना जरूरी है। अगर खांसी से ज्यादा परेशान कर रही है तो किसी डॉक्टर से जरूर मिलें। अपनेआप दवा लेना सही नहीं।

यह वायरस भी एक शख्स से दूसरे में फैलता है। एक बार घर के किसी सदस्य के माध्यम से यह घर के अंदर पहुंच जाए तो फिर अमूमन सभी को लपेटे में ले ही लेता है। फिर यह सांस की नलियों, फेफड़ों आदि अंगों में सूजन पैदा करता है। हां, घर के जिस सदस्य की इम्यूनिटी मजबूत होती है, उसे इससे परेशानी भी कम होती है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों की खांसी ठीक होने में 10 से ज्यादा दिन लग सकते हैं। अगर किसी को कोई पुरानी बीमारी हो तो मुमकिन है कि डॉक्टर उसे ऐंटिबायोटिक दवा भी दे दें। वैसे देखा यह जा रहा है कि इन्फ्लुएंजा-A वायरस ज्यादातर मामलों में बच्चों के माध्यम से घर तक पहुंच रहा है। बच्चों को यह इन्फेक्शन अपने स्कूलों से मिल रहा है। फिर बच्चे इस इन्फेक्शन को स्कूल से घर ला रहे हैं।

सिर्फ खांसी होने पर एक्स-रे या सीटी स्कैन कराने का फैसला पूरी तरह डॉक्टर का होना चाहिए। वैसे डॉक्टर किसी शख्स को एक्स-रे कराने की सलाह तब देते हैं जब सांस लेने में परेशानी हो, 2 हफ्तों से ज्यादा समय तक घरेलू नुस्खे आजमाने के बाद भी खांसी ठीक न हो रही हो, खांसी की वजह से सीने में दर्द रहता हो। वहीं कोरोना के केस में एक्स-रे और सीटी स्कैन की जरूरत तब पड़ती है जब कोरोना होने के बाद ठीक हो गया हो। रिपोर्ट भी नेगेटिव हो, लेकिन सांस लेने में परेशानी और खांसी होती हो। तब डॉक्टर ज्यादा विस्तार से समझने के लिए पहले एक्स-रे और बाद में सीटी स्कैन की सलाह देते हैं।

आजकल की खांसी में जहां वायरस की भूमिका है, वहीं पलूशन भी इसकी एक बड़ी वजह है। इसकी वजह से सांस की नलियों में सूजन, एलर्जी की परेशानी बहुत बढ़ गई है। ऐसे में दवा का असर होने में भी ज्यादा वक्त लगता है। अगर किसी को फीवर भी आ रहा है तो डॉक्टर की राय लेना जरूरी है।

जब शरीर के अंदर वायरस का इन्फेक्शन पहुंचता है तो हमारा इम्यून सिस्टम ऐक्टिवेट हो जाता है। हालांकि, इसी दौरान सांस की नली और फेफड़ों में सूजन पैदा होने लगती है। इसी का नतीजा खांसी है। इस इन्फेक्शन पर शरीर दो तरह से रिऐक्ट करता है। पहला, शरीर में मौजूद ऐंटिबॉडीज सीधे वायरस के खिलाफ लड़ती हैं। कोई स्राव (बलगम) नहीं होता है तो खांसी सूखी होती है। वहीं जब शरीर सांस की नली या फेफड़ों पर चिपके वायरस को हटाने के लिए स्राव निकालता है तो गीली खांसी। जितनी मात्रा में वायरस की मौजूदगी होती है या फिर सूजन होती है, बलगम भी उसी मात्रा में निकलता है। कई बार बुखार भी होने लगता है। इस दौरान अगर किसी ने ठंडी चीजें खाना जारी रखा तो यह वायरस के लिए पसंदीदा स्थिति बनती है। ऐसे में खांसी बहुत बढ़ जाती है। किसी को पहले सूखी खांसी, फिर गीली या फिर पहले गीली और बाद में सूखी खांसी हो तो ऐसा होना इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर इन्फेक्शन के खिलाफ किस तरह रिऐक्ट कर रहा है।

सभी तरह की खांसी में ऐसे राहत
हर दिन 2 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए, शरीर में पानी की कमी न होने दें। ठंडी चीजें खाने से बचें और ठंडी हवाओं से शरीर को बचाएं
ठंड के दिनों में दिनभर गुनगुना पानी पिएं
ज्यादा तली हुई और मसाले वाली चीजें खाने से बचें
अदरक, लौंग, काली मिर्च, कच्ची हल्दी, मुलैठी आदि को मिलाकर काढ़ा बनाकर पिएं

बहुत ही कम मामलों में यह जान को जोखिम में डाल रही है। ऐसे लोग जिन्हें इन्फेक्शन हो चुका है और खांसी बढ़ने से उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगे या दमा जैसी स्थिति बन जाए। बुखार भी कम न हो। सीधे कहें तो वह शख्स गंभीर निमोनिया होने की स्थिति में पहुंच जाए तो यह खतरनाक हो सकती है:

1. ऑक्सिमीटर में ऑक्सिजन का स्तर कम हो जाए और यह 92 से नीचे दिखने लगे।
2. दम फूलने की स्थिति हो।

गले की सामान्य परेशानी, खासकर जब वह खांसी, सर्दी आदि से जुड़ी हो तो गरारे काफी कारगर होते हैं। अहम बात यह है कि गरारे सामान्य गुनगुने पानी से, गुनगुने पानी में नमक मिलाकर या फिर गुनुगने पानी में बीटाडीन दवा मिलाकर करना चाहिए। ये तीनों उपाय अलग-अलग परिस्थितियों में काम आते हैं। जब गले में खराश हो या हल्की सूजन हो और इसकी वजह से खांसी हो तो गुनगुने पानी से गरारे करना फायदेमंद होता है। सिर्फ खराश है तो आवाज में बदलाव नहीं होता। तब गुनगुने पानी से गरारे करें। अगर खराश के साथ सूजन है यानी आवाज में बदलाव है तो गुनगुने पानी में नमक भी मिला दें। अगर खराश और सूजन के साथ दर्द भी है तो गुनगुने पानी में बीटाडीन दवा मिला सकते हैं। दरअसल, गले में दर्द बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन की वजह से होता है। ऐसे में बीटाडीन फायदेमंद है। एक दिन में 2-3 बार गरारे करना काफी है। साथ में डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

खांसी से जहां खांसनेवाला परेशान होता है, वहीं उसके साथ रहने वाले लोग भी परेशान हो जाते हैं। ऐसे मामलों में फ्लू की वैक्सीन कुछ कारगर हो सकती है। इससे यह गारंटी नहीं मिलती कि वैक्सीन मिलने के बाद फ्लू नहीं होगा, लेकिन इतना जरूर है कि वायरस इस कदर परेशान नहीं कर पाता, जैसा वैक्सीन न लेनेवाले को करता है।

भाप या स्टीम गले में जमे बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है। स्टीम की प्रक्रिया में सिर्फ सामान्य पानी को गर्म करके उसकी भाप को नाक और मुंह से अंदर खींचा जाता है। स्टीम ज्यादा असरदार तरीके से काम करे, इसके लिए जरूरी है कि हम खुद को स्टीमर समेत कंबल से ढक लें। सिर्फ सामान्य पानी को अच्छी तरह से उबालने (5 मिनट उबालना) के बाद स्टीम अंदर खींचने से फायदा होता है। कितनी देर तक करें स्टीम: एक बार में 5 से 7 मिनट तक स्टीम करना काफी है। पानी में कुछ भी न मिलाएं। किसी भी तरह की दवा या कैप्सूल या नमक कुछ भी नहीं। एक दिन में 2-3 बार स्टीम करना सही रहता है।

इसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना न करें। इस्तेमाल से पहले इसकी छोटी-सी ट्रेनिंग भी लें और सही तरीका सीखें। नेबुलाइज़र इस्तेमाल करने के लिए पहले मशीन में दवा डालनी पड़ती है जो मरीज की स्थिति और जरूरत को देखते हुए डॉक्टर लिखते हैं। नेबुलाइजेशन की प्रक्रिया अमूमन 10 मिनट की होती है। यह उनके फायदेमंद है, जिन्हें सांस लेने में परेशानी हो, ट्रेकिया या ब्रॉन्की में सूजन हो, अस्थमा की परेशानी हो। यह छोटे बच्चों के लिए फायदेमंद है जो सांस की नलियों से कफ खींचकर बाहर नहीं फेंक पाते। दरअसल, ज्यादातर बच्चों को कफ खींचना आता नहीं।

अगर किसी को खांसी है तो इसका सीधा-सा मतलब है कि उसकी सांस की नलियों में सूजन है। अगर हम सर्दियों में सामान्य पानी भी पीते हैं तो वह ठंडा ही रहता है। इससे सूजन कम नहीं होती। वहीं गुनगुना पानी पीने से सांस की नली में आई सूजन कम हो जाती है। गुनुगना पानी इसमें राहत पहुंचाता है। हां, यह फेफड़ों को तो उतना राहत नहीं पहुंचाता, लेकिन यह सांस की नलियों में मौजूद सूजन को कम करने में मदद जरूर करता है। इसलिए जब भी खांसी आदि की परेशानी हो, गुनगुना पानी पीना फायदा देता है।

अगर गीली खांसी है तो इसे खत्म करने के लिए डॉक्टर अमूमन ऐसी दवा या सिरप देते हैं जो कफ निकाले। अगर गीली खांसी में सूखी खांसी वाली दवा दी जाए तो बलगम अंदर ही दब जाता है जो बाद में नुकसान पहुंचाता है। खांसी को दबाने वाले सिरप खांसी आने की उत्तेजना को कम करते हैं। इसे सप्रेसेंट कहते हैं। खांसी की वजह पर असर करने वाली दवा बलगम बाहर निकालती है। इसे एक्सपेक्टरेंट कहते हैं। अगर किसी को सूखी खांसी है तो डॉक्टर की सलाह से सप्रेसेंट का इस्तेमाल करें और अगर बलगम वाली खांसी है तो एक्सपेक्टरेंट का।

 

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