ओडिशा तट के पास ONGC को मिली प्राकृतिक गैस, ‘समुद्र मंथन’ के तहत पहली खोज से बढ़ी उम्मीद
नई दिल्ली: भारत के अपतटीय तेल-गैस अन्वेषण अभियान को अहम सफलता मिली है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने ओडिशा तट से करीब 43 किलोमीटर दूर महानदी ऑफशोर बेसिन में प्राकृतिक गैस की खोज की है। 18 सितंबर 2026 को MN-DW18-1-H-D कुएं में मिली यह गैस ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना के तहत महानदी बेसिन में ड्रिल किया गया पहला कुआं है। ONGC के मुताबिक कुएं में पिछले तीन दिनों से उत्साहजनक प्रवाह और जलाशय दबाव के साथ गैस आ रही है। हालांकि, खोज में मौजूद गैस की मात्रा और व्यावसायिक उत्पादन की व्यवहार्यता का आकलन अभी बाकी है।
1,441 से 1,452 मीटर के बीच मिली गैस

ONGC ने MN-DW18-1-H-D कुएं की लक्षित ड्रिलिंग 1,623 मीटर तक की थी। गैस 1,441 से 1,452 मीटर के अंतराल में मिली। कुएं की ड्रिलिंग 25 जुलाई 2026 को शुरू हुई थी और 18 सितंबर को गैस की खोज हुई। यह महानदी बेसिन में ONGC के मौजूदा डीपवॉटर अभियान का पहला कुआं है।
कंपनी ने अभी गैस भंडार की मात्रा या संभावित उत्पादन क्षमता का आंकड़ा जारी नहीं किया है। आगे के मूल्यांकन और परीक्षण से ही यह स्पष्ट होगा कि खोज का व्यावसायिक स्तर क्या है।
‘समुद्र मंथन’ के तहत पहली बड़ी खोज
‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को मंजूरी दी थी। योजना के पहले चरण के लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य अपतटीय हाइड्रोकार्बन अन्वेषण में तेजी लाना, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना, साझा समुद्री बुनियादी ढांचा विकसित करना और तेल-गैस क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना है।
योजना के तहत 60 डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग के लिए 43,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साझा अपतटीय उत्पादन और निकासी बुनियादी ढांचे के लिए भी 10,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
तट से करीब 43 किलोमीटर दूर होने से विकास की संभावना
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महानदी बेसिन में मिली इस खोज की लोकेशन भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कुआं कोणार्क से करीब 43 किलोमीटर दूर है। ONGC के मुताबिक तट के अपेक्षाकृत करीब होने के कारण आगे मूल्यांकन और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य पाए जाने पर इसे जल्द बाजार में लाने की संभावनाएं बन सकती हैं।
कंपनी के अनुसार इस खोज को क्षेत्र में मौजूद अन्य खोजों के साथ साझा सुविधाओं के जरिए विकसित किए जाने की संभावना भी देखी जा सकती है। हालांकि, इसके लिए आगे की जांच और व्यावसायिक मूल्यांकन जरूरी होगा।
600 MMTOE से ज्यादा संसाधन बढ़ाने का लक्ष्य
केंद्र सरकार के अनुसार ‘समुद्र मंथन’ योजना का लक्ष्य अन्वेषण की सफलता की स्थिति में भारत के हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार में 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक की बढ़ोतरी करना है। योजना के तहत घरेलू तेल और गैस उत्पादन को मौजूदा करीब 62 MMTOE से बढ़ाकर 80 MMTOE सालाना करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के अनुसार अतिरिक्त घरेलू उत्पादन से कच्चे तेल के आयात में सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक की कमी की संभावित क्षमता है। हालांकि, ये लक्ष्य अन्वेषण की सफलता और खोजे गए संसाधनों के व्यावसायिक विकास पर निर्भर हैं।

