“कल्पना से नवाचार, नवाचार से समाधान, समाधान से राष्ट्र निर्माण” — कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने आंतरिक हैकथॉन SIH 2026 के दौरान विद्यार्थियों को दिया मार्गदर्शन

बरेली,02 सितम्बर। महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय (एम.जे.पी.रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय), बरेली के रुहेलखण्ड इनक्यूबेशन फाउंडेशन (RIF) भवन स्थित कॉर्पोरेट कॉन्फ्रेंस हॉल में आज आंतरिक हैकथॉन SIH 2026 (स्मार्ट इंडिया हैकथॉन 2026) का आयोजन किया गया।रुहेलखण्ड इनक्यूबेशन फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में तकनीकी नवाचार, रचनात्मकता एवं समस्या-समाधान क्षमता को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष के रूप में माननीय कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार राय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11:00 बजे हुआ। इस अवसर पर रुहेलखण्ड इनक्यूबेशन फाउंडेशन के मुख्य संचालन अधिकारी (COO) प्रोफेसर यतेन्द्र कुमार, निदेशक प्रोफेसर शोभना सिंह एवं निदेशक प्रोफेसर एस.के. पांडेय सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
छात्रों को सम्बोधित करते हुए कुलपति महोदय ने कहा कि “यह कल्पना को नवाचार में, नवाचार को समाधान में और समाधान को राष्ट्र निर्माण में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” उन्होंने अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी इस आंतरिक हैकथॉन के माध्यम से अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता, तकनीकी क्षमता और समस्या-समाधान की सोच को एक सशक्त मंच प्रदान कर रहे हैं।
प्रो. राय ने कहा कि हैकथॉन केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सोचने की एक संस्कृति है। यह समस्या को पहचानने, उसके मूल कारण को समझने और ऐसा समाधान खोजने की प्रक्रिया है जो समाज के जीवन को बेहतर बना सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज के समय में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती।
“हमें ऐसे युवा तैयार करने होंगे जो—
सोच सकें,
प्रश्न कर सकें,
प्रयोग कर सकें,
असफलता से सीख सकें
और नए समाधान विकसित कर सकें।”
कुलपति महोदय ने कहा कि हम अपने देश को ‘इंडिया’ की संकीर्ण छवि से निकालकर गौरवशाली ‘भारत’ की पहचान की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में तकनीक सदैव चरम पर रही है और पुष्पक विमान इस तकनीकी उत्कृष्टता का सजीव उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि नवाचार ही वह माध्यम है जिसमें चमत्कार करने की क्षमता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि OYO के संस्थापक के पास स्वयं का कोई होटल नहीं है, फिर भी विश्वभर के लाखों होटल उनके इशारे पर चलते हैं। इसी प्रकार Swiggy और Zomato के पास स्वयं का कोई रेस्तरां नहीं, लेकिन वे लाखों लोगों को भोजन उपलब्ध कराते हैं — यह सब नवाचार का ही परिणाम है।
प्रो. राय ने कहा कि भारत आज एक ऐसे दौर में है जहाँ हमारे युवाओं की प्रतिभा देश की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना केवल सरकार की योजनाओं से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए हमारे विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं, कक्षाओं और इनक्यूबेशन केंद्रों से निकलने वाले नवोन्मेषी विचार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
-------------------------------------------------------------------------------------------
कुलपति महोदय ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “हैकथॉन में केवल जीतना महत्वपूर्ण नहीं है। असफल होना भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।” उन्होंने कहा, “यदि आपका पहला प्रोटोटाइप सफल नहीं होता, तो उसे असफलता मत मानिए। उसे अपने अगले नवाचार की पहली सीढ़ी मानिए।”
प्रो. राय ने कहा कि “नवाचार वहाँ से शुरू होता है, जहाँ सामान्य सोच समाप्त होती है।” उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि परिणाम की चिंता किए बिना निरंतर आगे बढ़ें और नित्य नए करने की चेष्टा करें। उन्होंने कहा, “आपके पास संसाधन सीमित हो सकते हैं, समय सीमित हो सकता है, लेकिन आपकी कल्पना, जिज्ञासा और संकल्प की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि युवा मन स्थिर नहीं होता, अतः वे निरंतर कार्य एवं यात्रा (पर्यटन) द्वारा अनुभव प्राप्त करें। “ज्ञान से समाधान और समाधान से अनुभव तक की यात्रा ही आपको जीवन में आगे ले जाएगी।”
उन्होंने कहा, “कुछ भी असंभव नहीं है, आप सभी में ईश्वर का वास है।” उन्होंने परम पूज्य शंकराचार्य जी का उदाहरण देते हुए आत्मविश्वास एवं आस्था पर बल दिया। उन्होंने छात्रों से कहा कि अपने इतिहास को तुरंत लिखना शुरू करें और ऐसे सपने देखें जो उन्हें रातभर सोने ही न दें।
कुलपति महोदय ने कहा कि विश्वविद्यालय, प्रदेश एवं देश को आप सभी छात्रों से बहुत बड़ी-बड़ी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा, “जितना हमेशा महत्वपूर्ण नहीं है, किंतु सहभागिता (Participation) अधिक महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि हीरे सड़कों पर नहीं मिलते, बल्कि दुर्गम स्थानों पर पाए जाते हैं — इसलिए कठिन परिस्थितियों के लिए स्वयं को और अपनी जीवनशैली को तैयार करें।
इस आंतरिक हैकथॉन ने विद्यार्थियों को अपनी तकनीकी प्रतिभा दिखाने, टीम भावना और उद्यमशीलता की दिशा में एक सशक्त मंच प्रदान किया। रोहिलखंड इनक्यूबेशन फाउंडेशन ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के नवाचारी कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय के प्रेरक शब्दों ने सभी उपस्थित छात्रों में एक नई ऊर्जा, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने का जज्बा पैदा किया। यह आयोजन “कल्पना से नवाचार, नवाचार से समाधान, और समाधान से राष्ट्र निर्माण” की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

