उत्तर प्रदेशराज्य

गोण्डा में श्री मारुति सदन का झूलोत्सव स्वर्ण जयंती समारोह संपन्न, शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

गोण्डा: श्री मारुति सदन में झूलोत्सव स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन श्री यज्ञ देव पाठक नीरज गोनर्दीय के आयोजन में शास्त्रीय गायन और वादन के साथ संपन्न हुआ। समारोह में विभिन्न घरानों और संगीत परंपराओं से जुड़े कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत को जीवंत किया।

संगीत और साहित्य संरक्षण की सांस्कृतिक परंपरा को किया गया याद

शास्त्रीय संगीत की विदुषी प्रज्ञा पाठक ने बताया कि उनके पितामह महादेव प्रसाद पाठक और दादी विद्याधरी पाठक ने संगीत एवं साहित्य के सृजन और संरक्षण के लिए एक सांस्कृतिक नींव रखी थी। इसी परंपरा का विस्तार शताब्दी के रूप में झूलन उत्सव के आयोजन के माध्यम से हुआ।

राग मेघ मल्हार से लेकर ठुमरी और दादरा तक हुईं प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में भारतीय संगीत के किराना घराने के शास्त्रीय गायक अनुभव तिवारी ने प्रस्तुति दी। भातखंडे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मनोज मिश्र भी कार्यक्रम से जुड़े। पंडित किशन महाराज के शिष्य के संगतकर्ता आलोक कुमार मिश्र तथा भातखंडे विश्वविद्यालय के छात्र ने गुरु-शिष्य जुगलबंदी के रूप में तबला वादन प्रस्तुत किया।

तीन ताल और सोलह मात्रा की प्रस्तुति के दौरान सारंगी पर राकेश कुमार मिश्र ने संगत की। समारोह में राग मेघ मल्हार, छोटा ख्याल, बड़ा ख्याल, झूला, कजरी, ठुमरी और दादरा सहित विभिन्न रागों एवं संगीत विधाओं की प्रस्तुतियां हुईं।

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अयोध्या सहित विभिन्न स्थानों से पहुंचे कलाकार

कार्यक्रम में अयोध्या के मदन गोपाल मौर्य दादा श्री, अर्चना सिंह, महाराणा प्रताप सिंह राही, देवेन्द्र कुमार और सरदार गुरु मीत सिंह बिल्लू ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। गुरु तुलसीदास के गायन के साथ प्रसिद्ध तबलावादक अमोघ अनंत सहस्त्र बुद्धे ने संगत प्रदान की।

बाहर से आए कलाकारों को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह से सम्मान

श्रावण झूला शताब्दी समारोह में विभिन्न घरानों से आए कलाकारों को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। श्री मारुति सदन के शताब्दी झूला उत्सव समारोह को सफल बनाने में मनीषा पाठक, चंद्रेश्वर पाठक, कमलेश्वर पाठक, ज्ञानेश्वर पाठक, सर्वेश्वर पाठक, अद्वैत भारद्वाज, शारण्य भारद्वाज और निलय मिश्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम का संचालन प्रमोद नंदन श्रीवास्तव ने किया। समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ. जी. सी. श्रीवास्तव रहे, जिन्हें अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

 

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