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रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में ताइवानी मिड-ऑटम फेस्टिवल का आयोजन

बरेली, 26 सितम्बर।महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के बहुभाषा उत्कृष्टता केंद्र में मंदारिन भाषा का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार राय की अध्यक्षता में एवं केंद्र की समन्वयक प्रो० अनीता त्यागी के मार्गदर्शन में तथा मंदारिन भाषा शिक्षिका चियाली चेन के सहयोग से ताइवान के पारंपरिक मिड-ऑटम फेस्टिवल का उत्साहपूर्वक आयोजन किया। यह पर्व ताइवान सहित एशिया के अनेक देशों में पारंपरिक रूप से मनाया जाता है और परिवार, मित्रता, एकजुटता तथा चंद्रमा के प्रति सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।
कार्यक्रम के दौरान चियाली चेन ने विद्यार्थियों को मिड-ऑटम फेस्टिवल की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, परंपराओं और इससे जुड़ी प्रसिद्ध लोककथा ‘चांग-ए की चंद्रमा की ओर उड़ान’ के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों को इस अवसर पर पारंपरिक रूप से खाए जाने वाले पोमेलो फल के सांस्कृतिक महत्व से भी परिचित कराया गया।
उत्सव को अधिक रचनात्मक एवं सहभागितापूर्ण बनाने के लिए विद्यार्थियों ने पोमेलो आर्ट एंड क्राफ्ट गतिविधि में भाग लिया। विद्यार्थियों ने पोमेलो को विभिन्न रचनात्मक रूपों में सजाकर अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को ताइवानी संस्कृति और पर्व की परंपराओं को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी शिक्षिका द्वारा तैयार की गई ताइवान की परंपरागत ऊलोंग चाय एवं विभिन्न स्नैक्स का भी आनंद लिया। चाय, भोजन और संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों ने मिड-ऑटम फेस्टिवल से जुड़े पारिवारिक एवं सामुदायिक सौहार्द की भावना को निकटता से अनुभव किया। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने लोकप्रिय मंदारिन गीत ‘दा मून रिप्रेसेन्टस माई हार्ट’ सीखा और सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया। गीत-संगीत ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया तथा विद्यार्थियों को मंदारिन भाषा के उच्चारण और प्रयोग का सहज अभ्यास करने का अवसर मिला।
इस अवसर पर आयोजित विभिन्न गतिविधियों ने विद्यार्थियों को केवल मंदारिन भाषा सीखने तक सीमित न रखते हुए ताइवान की संस्कृति, लोकपरंपराओं, खान-पान, संगीत और रचनात्मक अभिव्यक्ति से भी परिचित कराया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए मिड-ऑटम फेस्टिवल के सांस्कृतिक एवं मानवीय पक्ष को समझा और ताइवानी संस्कृति के प्रति अपनी रुचि एवं सराहना व्यक्त की।
केंद्र में आयोजित यह सांस्कृतिक आयोजन कक्षा स्तर पर मनाया गया जिसका विश्वविद्यालय स्तर पर भव्य आयोजन अक्टूबर माह में किया जाएगा। भाषा-अध्ययन को सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में यह आयोजन केंद्र की एक सार्थक पहल रहा, जिसने विद्यार्थियों के लिए मंदारिन भाषा एवं ताइवानी संस्कृति के अध्ययन को और अधिक जीवंत एवं रोचक बनाया।

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बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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